ग्रेटर नोएडा बिल्डिंग हादसा 70 घंटे बाद खत्म हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी गांव के इस बड़े हादसे ने सबका दिल दहला दिया वही इस हादसे के बाद चले लम्बे रेस्क्यों में करीब 70 घंटे तक काम चला इस रेस्क्यू ऑपरेशन में नौ शव बरामद किये गए. शुक्रवार (20 जुलाई) को मलबे से मृतक का एक पैर भी मिला. साथ ही बाइक, इनवर्टर जैसी चीजे भी बरामद हुईं. शुरुआत के दो दिन एनडीआरएफ को उम्मीद थी की मलबे में दबे लोग ज़िंदा हो सकते हैं, इसलिए सावधानी के साथ मलबा हटाया जा रहा था. लेकिन, गुरुवार (19 जुलाई) के बाद जिंदा लोगों की उम्मीद खत्म हो गई. इसके बाद तेजी से काम चला और शुक्रवार शाम तक ये काम खत्म हो गया.

वहीं, इस हादसे के बाद ग्रेटर नोएडा वेस्ट के शाहबेरी समेत 40 गांवों में प्राधिकरण अवैध इमारतों का सर्वे कराएगा. सर्वे में ये पता लगाया जाएगा कि इलाके में कुल कितने अवैध फ्लैट बने हुए हैं.रेस्क्यू के बाद अधिकारियों की टीम घटनास्थल पहुंची और छानबीन की. आपको दें कि मंगलवार देर रात छह-छह मंज़िल की दो इमारत धराशाई हो गई थीं. इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तारी भी हुई है. जबकि, अथॉरिटी के भी कुछ जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है.

हादसे के बाद अथॉरिटी की आंख भी खुली है. बताया रहा है कि जल्द ही जेपी हाइट इमारत को सील कर दिया जाएगा. साथ ही बिसरख थाने में तहरीर भी दी गई है. जो लोग अभी फ्लैट में रह रहे हैं. उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा. दरअसल, ये इमारत कुछ दिन पहले चार इंच जमीन में धंस गई थी. इससे इमारत में दरार आ गई है. प्राधिकरण के इंजीनियर जब निरीक्षण के लिए पहुंचे, तो हालात देखकर वो भी हैरान रह गए.

जिस जमीन पर फ्लैट बनाए गए हैं, वो प्राधिकरण की जमीन है और किसानों की आबादी वहां बसी है. किसानों को आबादी की जमीन पर आवास के लिए सिर्फ ढाई मंजिल मकान बनाने का अधिकार है. इससे अधिक ऊंचाई की इमारतों को अवैध घोषित किए जाने की तैयारी है. सर्वे के बाद अवैध इमारत बनाने वालों के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया जाएगा. सर्वे टीम को उन लोगों के नामों की पहचान के निर्देश दिए गए हैं.

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