बरसात होने के कारण हरी सब्जियों की कीमतों में लगी आग

आलू और बैगन को छोड़कर अन्य सब्जियां 30 से 40 रुपये किलों

रायपुर:विगत एक पखवाड़े से सब्जी की कीमत आसमान छू रही है। ऐसी स्थिति में गरीब ही नहीं बल्कि मध्यम वर्गीय परिवारों की हाथो से हरी सब्जी गायब हो चुकी है। वैसे तो बरसात के महीने में सब्जी हमेशा ही मंहगी बिकती है। लेकिन इस वर्ष हरी सब्जियों की कीमतों में आग लगी है।

आलू और बैगन को छोड़कर अन्य सब्जियां 30 से 40 रुपये किलों के दर पर बिक रही है। ऐसे में लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि क्या खाए या न खाए। कई घरों में केवल आलू या आलू के साथ चने की सब्जी से ही काम चलाया जा रहा है।

चिल्हर बाजार में प्याज अभी भी 50 रुपये किलो बिक रही है। प्याज के साथ ही फूलगोभी और ग्वालफल्ली भी सेंचुरी पार है। वहीं थोक बाजार में भिंडी 20 तो गोभी 30 रुपये किलो के रेट से बिक रही है। करेला, टमाटर का दाम चिल्हर में 40 रुपये किलो है।

वहीं मिर्ची 50 और शिमला मिर्च 50 रुपये किलो मिल रहा है। खीरा, मूली और हरी साग भी बाजार में 30 रुपये किलो है। जिले के ग्रामीण इलाके नेवारीकला, मुल्ले, कुर्सीपार, ओरमा, शिकारीपारा, सांकरी, पर्रेगुड़ा, मालगांव, मड़वापथरा, अरौद, भेंगारी सहित आस पास के गांवों से आती है।

वहीं कुछ सब्जियां जिले के पड़ोसी जिले धमतरी और राजनांदगांव से भी आतीं हैं। सब्जी व्यापारी मनोहर गुप्ता ने बताया कि ग्रामीण अंचलों से सब्जी की आवक तो हो रही है लेकिन बरसात के चलते गांव से आने वाले कोचिए मंडी आना बंद कर दिए हैं। जिसके चलते गांव से सब्जियों की आवक कम हो रही है।

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