छत्तीसगढ़

ग्राम चुरकीदादर में समिति द्वारा किया गया सामूहिक मीटिंग

हितेश दीक्षित:

छुरा: गरियाबंद के आदिवासी विकास खण्ड छुरा मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूरी पर बसे ग्राम चुरकीदादर में समिति द्वारा सामूहिक मीटिंग किया गया। जिसमे ग्रामीणों द्वारा ग्राम चुरकीदादर को नवीन समिति का दर्जा प्राप्त होने के लिए ग्रामीण पिछले 6 सालों से बीजेपी सरकार से हक की लड़ाई लड़ रहे है फिर भी उन्हें मांगे पूरी नही हुई।

मांग को जल्दी ही पूर्ति करने की आग्रह

अब नई सरकार कांग्रेस से अपनी मांग को लेकर फिर से प्रस्ताव रख चुके एवं मांग को जल्दी ही पूर्ति करने की आग्रह कर चुके है। लेकिन अभी तक शासन द्वारा किसी भी तरह का ना तो आश्वासन मिला नही मांगे पूरी की गई है इससे क्षुब्ध होकर ग्रमीणों द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव को बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है।

तेंदूपत्ता समिति दुल्ला (कोसमी) में कुल 10 संग्रहण केन्द्र हैं जिनमे दुल्ला, कोसमी, भैसामुड़ा, बागबाहरा, चुरकीदादर, सुभउपन्ना, खलियापारा, जलकीपनी, आमापारा एवं पल्टनपारा है जिसमे चुरकीदादर, सुभउपन्ना, जलकीपनी, पल्टनपारा में बहुत ही गुणवक्तायुक्त तेंदूपत्ता पैदावार होती है जबकि दुल्ला, भैसामुड़ा, कोसमी एवं बागबाहरा में गुणवक्तायुक्त तेंदूपत्ता नही मिलता जिसके वजह से पूरे समिति को संग्रहन कार्य बंद कर दिया जाता है।

बंद होने के बाद भी चुरकीदादर क्षेत्र में काफी मात्रा में शाकर्तन का गुणवक्ता युक्त तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए बच जाता है जिससे गुणवक्तायुक्त तेंदूपत्ता होते हुए भी ग्रामीण नही तोड़ पाते है जिससे वनवासियो को तेंदूपत्ता का पूरा लाभ नही मिल पाता है और इन पांच फड़ो में औसतन 750 मानक बोरा का आवक होती है

जबकि नवीन तेंदूपत्ता समिति चुरकीदादर बनने के बाद ग्रमीणों ने बताया कि समस्त संग्राहक 1200 मानक बोरा का लक्ष्य देंगे। स्थिति-परिस्थिति को देखते हुए अब हम समस्त संग्राहकों के द्वारा तेंदू, बूटा, छोपाई तथा तेंदूपत्ता तोड़ाई बंन्द किया जा रहा है जिससे अंचल में शासन-प्रशासन के विरुद्ध भारी जनआक्रोश व्याप्त हो गया है तथा उनके द्वारा यह भी निर्णय लिया जा रहा है कि हमारे इस मांग को पूरा नही करने की स्थिति में आगामी लोकसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया जा सकता है।

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