जीएसटी कलेक्शन में आयी है कमी, समीक्षा के लिए जिस पैनल का गठन किया गया है

नयी दिल्ली: दो साल पहले जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लॉन्च किया गया था. ऐसे में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इसकी सबसे बड़ी समीक्षा शुरू कर दी है. समीक्षा के तहत सरकार फिर से जीएसटी की स्लैब और दरें तय कर सकती है. जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने के लिए और लीकेज को रोकने के लिए सरकार ने इसकी समीक्षा शुरू की है. इसके लिए एक बड़ी टीम भी बनायी है.

12 अधिकारियों की कमेटी करेगी समीक्षा का काम : जीएसटी की समीक्षा का काम केंद्र और राज्य सरकारों के 12 अधिकारियों की एक कमेटी को सौंपा गया है. शुक्रवार को राज्य के सचिवों पर जीएसटी को लेकर बातचीत प्रस्तावित है. ऐसी संभावना है कि मीटिंग के दौरान राज्यों से जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने के लिए कहा जा सकता है.

सरकार कर सकती है कई बदलाव

समीक्षा के लिए जिस पैनल का गठन किया गया है, उसका काम जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने और इसमें धोखाधड़ी को रोकने का भी होगा.

सूत्रों के अनुसार, सरकार ऐसे नियम बना सकती है जिससे लोग खुद ही जीएसटी के दायरे में जुड़ना चाहें. इसके अतिरिक्त जीएसटी रिव्यू कमेटी सरकार को कुछ उत्पादों को जीएसटी स्लैब में लाने पर विचार करने को कह सकती है. जब जीएसटी को लागू किया गया था तो सरकार 12% और 18% वाले स्लैब को मिला कर एक नया स्लैब बनाने और सबसे अधिक जीएसटी वाले स्लैब में शामिल किये गये वस्तुओं की संख्या में कमी करने की सोच रही थी.

जीएसटी कलेक्शन में आयी है कमी

पिछले कुछ महीनों से जीएसटी कलेक्शन में कमी आयी है. मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीएसटी कलेक्शन की ग्रोथ रेट 5% से कम रही है जबकि इसका लक्ष्य 13 फीसदी से ज्यादा का था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कमी ऑटो सेक्टर में आयी सुस्ती, बाढ़ और स्लोडाउन के चलते हुई है. सालाना 14 फीसदी से कम इजाफे की स्थिति में केंद्र सरकार ने राज्यों को भरपाई की बात कही है. मामले में विपक्षी सरकारों ने कहा है कि जीएसटी व्यवस्था में खामियों की वजह से कलेक्शन में कमी आयी है.

जीएसटी की खामियां दूर होंगी : वित्त मंत्री

पुणे : जीएसटी को लेकर के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि तमाम परेशानियों के बाद भी यह देश का कानून है, जिसका पालन सभी को करना है.

वित्त मंत्री ने कहा कि इसमें खामियां हो सकती हैं, जिनसे लोगों को परेशानी हो रही है और इसको दूर किया जायेगा. ससंद और राज्यों की विधानसभा में पास होकर अब यह देश का एक कानून बन चुका है. वित्त मंत्री ने पुणे में कारोबारियों, सीए और अन्य से बात करते हुए कहा कि मैं खुद पहले दिन से चाहती थी कि यह लोगों के अपेक्षाओं पर पूरी तरह से खरा उतरे.

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