जीएसटी से देश का सबसे बड़ा रंगमंच ‘मराठी थिएटर’ ख़तरे में

मुंबई: देश के सबसे बड़े मराठी रंगमंच को वस्तु एवं सेवा कर विधेयक से चुनौती मिली है. इनके 250 रुपये से महंगे टिकटों पर 18 प्रतिशत कर प्रस्तावित है. जबकि, पिछले 6 दशक से इस इंडस्ट्री को टैक्स फ्री रखा गया था.

व्यावसायिक नाट्य निर्माता संघ के अध्यक्ष प्रसाद काम्बली ने बताया कि नई कर प्रणाली से मराठी नाटक उद्योग को आमदनी कम होने का डर सता रहा है. किसी नाटक में 2 कलाकार होते हैं तो किसी में 20 कलाकार. जीवंत प्रदर्शन का हिसाब-किताब तो और ही अलग है. इन सभी पर जीएसटी लागू होने से उनकी आमदनी एक तरफ घटेगी तो दूसरी तरफ, थिएटर से जुड़ी दूसरी चीजें महंगी होंगी. इस से किसी भी थिएटर की लागत बढ़ जाएगी.

सभी भाषाई थिएटर के मुकाबले मराठी व्यावसायिक थिएटर के लिए नई टैक्स रचना चिंता का विषय अधिक है क्योंकि, देश में सालभर व्यावसायिक थिएटर के रूप में यही अकेली इंडस्ट्री कार्यरत है. महाराष्ट्र के 5 लाख परिवार इस इंडस्ट्री पर अपना गुजारा करते हैं. अगर जीएसटी लागू हुआ तो रंगमंच की आमदनी पर प्रतिकूल असर होगा.

नाटक निर्माताओं समेत अन्य वर्ग महाराष्ट्र सरकार से मामले में दखल की उम्मीद लगाए बैठे हैं. महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने इस पहल को लेकर कहा कि सरकार रंगमंच से जुड़े लोगों के साथ हमदर्दी रखती है. सरकार ने थिएटर से जुड़े मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से गुजारिश की है कि नाटक से होने वाली आमदनी पर जीएसटी पूर्व कर प्रणाली बरकरार रहे.

जीएसटी में नाटक, संगीत के आविष्कार को एक दायरे में ला कर कर रचना की गई है. इसका असर न सिर्फ़ टिकटों पर होने वाला है बल्कि कला आविष्कार से जुड़ी सभी चीजें महंगी होंगी.

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