जीएसटी : मार्च तक संशोधित एमआरपी का स्टीकर लगा सकती हैं कंपनियां

अब कंपनियां अपने अब तक नहीं बिके उत्पादों पर संशोधित एमआरपी का स्टीकर मार्च 2018 तक लगा सकती हैं

जीएसटी : मार्च तक संशोधित एमआरपी का स्टीकर लगा सकती हैं कंपनियां

सरकार ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद उत्पादों के न्यूनतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में हुए बदलाव के मद्देजर कंपनियों को संशोधित एमआरपी का स्टीकर लगाने की मंजूरी दे दी है. अब कंपनियां अपने अब तक नहीं बिके उत्पादों पर संशोधित एमआरपी का स्टीकर मार्च 2018 तक लगा सकती हैं. उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने शनिवार को इसकी जानकारी दी.

एक जुलाई से प्रभावी जीएसटी के बाद कंपनियों को नहीं बिके उत्पादों पर संशोधित एमआरपी का स्टीकर लगाने की मंजूरी पहले सितंबर तक के लिए दी गई थी जिसे बाद में दिसंबर तक बढ़ा दिया गया था. नवंबर में करीब 200 उत्पादों पर कर की दर कम करने के बाद मंत्रालय ने अतिरिक्त स्टीकर लगाने की मंजूरी दी थी.

पासवान ने बताया, ‘जीएसटी के मामले में हमने कंपनियों को नहीं बिके उत्पादों पर दिसंबर तक संशोधित एमआरपी का स्टीकर लगाने की मंजूरी दी थी. जीएसटी परिषद की पिछली बैठक में करीब 200 उत्पादों पर कर की दर कम की गई थी. इसीलिए हमने दिसंबर तक की समय सीमा को मार्च 2018 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है.

मंत्रालय ने पिछले महीने पहले से पैक उत्पादों की घटी एमआरपी दिखाने के लिए अतिरिक्त स्टीकर लगाने की मंजूरी दी थी. दैनिक इस्तेमाल की करीब 178 वस्तुओं को 28 प्रतिशत के कर दायरे से निकालकर 18 प्रतिशत के दायरे में लाया गया था. इसके साथ ही सभी तरह के रेस्तराओं एसी और नॉन-एसी दोनों के लिए पांच प्रतिशत की समान दर तय कर दी गई थी.

उपभोक्ताओं को घटी दर का लाभ सुनिश्चित कराने के लिए पासवान ने पिछले महीने राज्यों के मापन अधिकारियों को इस बात की जांच करने का निर्देश दिया था कि कंपनियां संशोधित एमआरपी का स्टीकर लगा रही हैं या नहीं.

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