भीषण गर्मी एवं लू की बढ़ती प्रवृृत्ति को देखते हुए बचाव के लिए दिशा- निर्देश जारी

- मनोज मिश्रा

महासमुंद: जलवायु परिवर्तन एवं वैश्विक तापमान में औसत रूप से हुई वृद्वि के कारण पिछड़े कुछ वर्षो से छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न हिस्सों में अप्रैल माह से ही भीषण गर्मी पड़ने एवं लू चलने इत्यादि की बढ़ती हुई प्रवृृत्ति देखी गई जो जून माह तक चलती है। इस वर्ष भी माह अप्रैल से तापमान बढ़ने एवं भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है।

इसे दृष्टिगत रखते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा भीषण गर्मी उनके दौरान नागरिकों को लू से बचाने के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जिलों में भीषण गर्मी एवं लू से बचाव हेतु ‘‘लू-कार्ययोजना‘‘ बनाने तथां पाम्पलेट तैयार कर ‘‘लू लगने से बचाव हेतु क्या करें, क्या ना करें ‘‘ का पोस्टर तैयार कर सभी ग्राम पंचायतों, विकासखण्डों, तहसीलों एवं जिला स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए है।

ग्राम सभाओं मंे ग्रामीणों को ‘‘लू‘ से बचाव‘‘ के संबंध में जानकारी देने तथा कलाजत्था के सहयोग से गीत, नुक्कड़ नाटक एवं प्रहसन के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने को भी कहा गया है। इसी तरह सभी जिला मुख्यालयों में कण्ट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश भी दिए है। इसके लिए सभी जिला, तहसील एवं विकासखण्ड़ स्तर पर नोडल अधिकारी की नियुक्ति कर उनके दूरभाष, मोबाईल नम्बर एवं ई-मेल की जानकारी भी रखी जाएगी।

‘‘लू‘‘ से जन-धन की हानि होने पर राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के अन्तर्गत हितग्राहियों को अनुदान सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश है। यह भी निर्देश दिए गए हैैं कि अत्यधिक प्रभावित स्थानों के लिए मोबाईल चिकित्सा दल की व्यवस्था करें। अत्यधिक गर्मी से पीड़ित बच्चों, वृद्धों, गर्भवती महिलाओं तथा गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखने तथा अस्पतालों में आइशोलेशन वार्ड की भी व्यवस्था करने कहा गया है।

सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पेयजल एवं जीवन रक्षक घोल (व्त्ै) की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। सार्वजनिक स्थलों पर अस्थाई प्याऊ घरों की व्यवस्था करने के साथ ऐसे स्थानों पर लू से बचाव सूचना प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह खराब हैण्डपम्पों की मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

गर्मी के कारण आगजनी की घटनाएं भी हो सकती है। आगजनी की घटनाओं से निपटने एवं उनके रोकथाम के लिए भी निर्देश दिए गए है। इसी तरह मजदूरों के लिए पेयजल एवं अस्थायी आश्रय स्थल (ैीमसजमत) स्थापित करने एवं पशु-पक्षियों के लिए भी पानी उपलब्ध कराने हेतु समुचित व्यवस्था करने को कहा गया है।

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