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यहां डॉक्टरों को ‘चरक शपथ’ दिला रहा RSS

अहमदाबाद: गुजरात में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन नेशनल मेडिकोस ऑर्गनाइजेशन (NMO) द्वारा मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए एक नई पहल की गई है।

चिकित्सा विज्ञान से जुड़े तमाम छात्रों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए एनएमओ के द्वारा गुजरात के करीब 3500 मेडिकल स्टूडेंट्स को ‘चरक शपथ’ दिलाई गई है।

मेडिकल स्टूडेंट्स को दिलाई गई चरक शपथ का नाम आयुर्वेद के जनक माने जाने वाले महर्षि चरक के नाम पर रखा गया है।

देश के चिकित्सा जगत से जुड़े युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए आरएसएस की मेडिकल विंग द्वारा इसकी शुरुआत की गई है।

संघ का मानना है कि चरक संहिता हिंदुस्तानी चिकित्सा पद्धति के इतिहास का हिस्सा है और प्रत्येक मेडिकल स्टूडेंट को इस पर गर्व होना चाहिए।

वहीं इसे और लोकप्रिय और सभी छात्रों तक पहुंचाने के लिए संघ द्वारा पिछले 15 वर्षों से प्रयास किए जा रहे थे और इस वर्ष एनएमओ द्वारा चरक संहिता के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में गुजरात के 17 मेडिकल कॉलेजों के कुल 3500 विद्यार्थियों को शामिल किया गया।

शपथ में कुछ भी गलत नहीं

गुजरात में संघ के इस कदम का कई चिकित्सकों ने स्वागत किया है। इस कार्यक्रम के आयोजन पर इंडियन मेडिकल असोसिएशन के गुजरात चैप्टर के अध्यक्ष योगेंद्र मोदी ने कहा कि मेडिकल स्टूडेंट्स द्वारा अब तक ली जाने वाली हेपोक्रेटिक ओथ और चरक शपथ दोनों का ही उद्देश्य मरीजों की सेवा और मानव जाति का हित करना है,

इस कारण चरक शपथ में कुछ भी गलत नहीं कहा जा सकता। वहीं अहमदाबाद मेडिकल असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. वसंत पटेल ने कहा कि चरक संहिता का संबंध आयुर्वेद से है

और नई चिकित्सा पद्धति के छात्रों का इसमें लिखी शपथ से कोई सारोकार नहीं है इसलिए अच्छा होता कि इस शपथ को आयुर्वेद से जुड़े छात्रों को दिलाया जाता।

गुजरात से ही क्यों हुई शुरुआत

चरक संहिता के शपथ ग्रहण समारोह के लिए गुजरात के चुने जाने को लेकर एनएमओ के अध्यक्ष डॉ.मनुभाई पटेल ने कहा कि संघ के इस संगठन की शुरुआत साल 1977 में ही की गई थी।

उन्होंने कहा कि संगठन के लोगों द्नारा तभी से चरक शपथ को सामाजिक रुप से प्रशस्त करने के लिए काम किया जा रहा है। पिछले 15 साल में इस अभियान को बल मिला है और संगठन इस दिशा में देश के 18 राज्यों में सक्रिय रूप से काम भी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि चूंकि गुजरात इन गतिविधियों की शुरुआत से ही इस अभियान का हिस्सा रहा है इसी कारण हर साल के तरह इस साल भी यहां ऐसे शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया है।

‘देश की संस्कृति पर होना चाहिए गर्व’

मनुभाई पटेल ने कहा जिस वक्त चरक ने भारतीय चिकित्सा पद्धति की स्थापना की उस वक्त तक हिपोक्रेट्स का जन्म भी नहीं हुआ था। इसके अलावा चरक संहिता मेडिकल स्टूडेंट्स और डॉक्टरों दोनों के लिए उपयुक्त है जबकि हिपोक्रेटिस ओथ का सीधा संबंध सिर्फ डॉक्टरों से ही है।

उन्होंने कहा कि इन सब के अलावा सबसे बड़ा अंतर ये है कि चरक एक भारतीय थे। हमें अपने देश के नागरिक पर किसी विदेशी से ज्यादा विश्वास और गर्व होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ये बात सही है कि हिपोक्रेट्स द्वारा चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में बड़े योगदान दिए गए हैं लेकिन इन सब के बीच हमें अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए।

‘चरक संहिता में वर्तमान चिकित्सा पद्धति से जुड़ी बातों का जिक्र’

वहीं एनएमओ के गुजरात राज्य के अध्यक्ष डॉ.प्रकाश कुर्मी ने चरक शपथ के बारे में बताते हुए कहा कि इसे महर्षि चरक की चरक संहिता से लिया गया है।

उन्होंने कहा कि चरक संहिता में हिपोक्रेट्स के द्वारा लिखित सभी सिद्धांत पहले से ही निहित हैं और यह हमारी संस्कृति के मूल से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि चरक शपथ में वर्तमान चिकित्सा पद्धति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातों का जिक्र किया गया है जैसे कि किसी महिला मरीज की जांच उसके परिवारवालों की मौजूदगी में की जाए और चिकित्सक मरीजों की बीमारी को पैसे कमाने का जरिया न समझें। इन बातों के कारण कहा जा सकता है कि चरक संहिता आज के परिवेश में ज्यादा उपयुक्त है।

भविष्य में भी आयोजित होंगे कार्यक्रम

वहीं कार्यक्रम के आयोजन के बारे में बात करते हुए एनएचएल मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पंकज पटेल ने कहा कि एनएमओ द्वारा चरक शपथग्रहण के समारोह का आयोजन कॉलेज प्रशासन की अनुमति के बाद किया गया।

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में कॉलेज के 230 छात्र शामिल हुए और कोशिश होगी कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सके।

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