पाक के लिए जासूसी, पूर्व राजनयिक माधुरी गुप्ता को 3 साल की सजा

नई दिल्ली। पूर्व राजनयिक माधुरी गुप्ता को पटियाला हाउस कोर्ट ने पाकिस्तान के खुफिया संगठन आईएसआई को देश की खुफिया जानकारी देने के मामले में तीन साल कैद और 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

गुप्ता को हाईकोर्ट में अपील करने के लिए जमानत भी दे दी गई है। वह इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में काम कर चुकी हैं। सजा सुनाते हुए शनिवार को एडिशनल सेशन जज सिद्धार्थ शर्मा की बेंच ने कहा कि दोषी ने ईमेल के जरिये देश की संवेदनशील जानकारी देश के दुश्मन को भेजी।

बता दें कि शुक्रवार को माधुरी गुप्ता को जासूसी और गलत ढंग से सूचना प्रदान करने के आरोपों के लिए आॅफिशियल सीक्रेट एक्ट धारा तीन और पांच के तहत दोषी ठहराया गया था।
सुनवाई के दौरान पुलिस के वकील ने गुप्ता को तीन साल की सजा देने की मांग की थी। वहीं, गुप्ता के वकील ने उनकी देश के लिए पिछली सेवाओं को देखते हुए कम से कम सजा देने का आग्रह किया था। 22 अप्रैल 2010 को माधुरी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। उन पर पाकिस्तानी अधिकारियों को गुप्त सूचना मुहैया कराने और आइएसआइ के दो अधिकारियों मुबशर राजा राणा और जमशेद के संपर्क में रहने का आरोप था।

माधुरी इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास में द्वितीय सचिव (प्रेस और सूचना) के पद पर नियुक्त थीं। उन्हें आईएसआई को भारत की गुप्त जानकारियां देने के आरोप में 22 अप्रैल 2010 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि वह आईएसआई के दो अधिकारियों मुबशर राजा राणा और जमशेद के संपर्क में थीं। जुलाई, 2010 में माधुरी के खिलाफ दायर आरोपपत्र में कहा गया था कि माधुरी के जमशेद के साथ संबंध थे और माधुरी ने उससे शादी करने की योजना बनाई थी।

आरोपपत्र में कहा गया था कि वह इस्लामाबाद के अपने आवास पर लगे एक कंप्यूटर और ब्लैकबेरी फोन के जरिये दोनों पाकिस्तानी जासूसों से संपर्क में रहती थीं। हालांकि, माधुरी गुप्ता का दावा है कि वह निर्दोष हैं। उन्होंने ट्रायल के दौरान कहा कि इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के अधिकारी ने उन्हें झूठे मामले में फंसाया है। उस अधिकारी के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण थे।
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