राजनीति

BJP से उसका गढ़ गुरदासपुर कांग्रेस ने इस तरह से छीन लिया

कांग्रेस ने उपचुनाव में गुरदासपुर लोकसभा सीट भाजपा से छीन ली. कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने 1.93 लाख मतों से भाजपा उम्‍मीदवार स्‍वर्ण सलारिया को शिकस्‍त दी. यह सीट भाजपा सांसद विनोद खन्ना के निधन से खाली हुई थी.

पंजाब सूबे में कांग्रेस छह महीने से सत्ता में है. ये चुनाव कांग्रेस सरकार के लिए संजीवनी साबित हुई थी. इसके बाद कांग्रेस ने गुरदासपुर में पूरी ताकत झोंक दी थी. इसका असर भी दिखा और लोगों ने भी कांग्रेस सरकार के उम्मीदवार सुनील जाखड़ में विश्‍वास जताया.

इस वजह से भाजपा और अकाली दल को हुआ नुकसान
दूसरी तरफ अगर बीजेपी की बात करें तो उसके खेमे में एकजुटता का अभाव रहा. विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना ने खुलकर बीजेपी की कैंपेनिंग में हिस्सा नहीं लिया. कांग्रेस ने पूरी कोशिश करके अपने आप को एकजुट पार्टी के रूप में पेश किया और प्रताप बाजवा जैसे विरोधी भी खुलकर जाखड़ के समर्थन में रहे. वहीं अकाली दल के नेता सुच्चा सिंह लंगाह का कथित रेप वीडियो सामने आने से अकाली दल को काफी नुकसान हुआ. रेप का इल्ज़ाम लगने के बाद गुरदासपुर से नामी अकाली नेता लंगाह और उनके कार्यकर्ता ठंडे पड़ गए.

सलारिया की अश्लील तस्वीरों से उनकी छवि को भी नुकसान पहुंचा. जीएसटी और नोटबंदी के मुद्दों पर भी अकाली दल और बीजेपी जनता को संतुष्ट नहीं कर पायी. इतना ही नहीं गुरदासपुर चुनाव में अकाली दल और बीजेपी के नेताओं के बीच भी मतभेद रहा. उन्होंने इकट्ठे होकर चुनाव प्रसार में हिस्सा नहीं लिया. इसका फायदा कांग्रेस को हुआ.

‘आप’ में रही ये कमी
पंजाब में जीत का सपना देख रही आम आदमी पार्टी अपने आप को माझा में स्थापित नहीं कर पायी है और पंजाब के चुनावों के बाद फिर अपनी पकड़ नहीं बना पायी. पार्टी के पास फंड्स की भी कमी रही और साथ ही प्रोत्साहन और उत्साह की भी कमी रही.

लोकसभा चुनाव 2019 को नज़र में रखते हुए कांग्रेस ने इन उपचुनावों पर कड़ी मेहनत की और नवजोत सिंह सिद्धू ने जीत के बाद कहा कि यह नतीजा राहुल गांधी के लिए दीवाली तोहफा है. सुनील जाखड़ 2014 के लोक सभा चुनाव हारे थे और इसके बाद वो 2017 का विधानसभा चुनाव भी हार गए. इसकी वजह से गुरदासपुर के उपचुनाव जीतना उनके लिए अहम मुद्दा बन गया था.

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने अपना पूरा समर्थन जाखड़ को दिया क्योंकि यह जीत अमरिंदर सिंह की पार्टी पर पकड़ बनाने के लिए भी ज़रूरी थी.

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