सामाजिक कुरीतियों को दूर करने गहिरा गुरू ने किया अनुकरणीय कार्य : डॉ. रमन

-सरगुजा विश्वविद्यालय परिसर में किया सीएम ने किया प्रतिमा का अनावरण

रोशन सोनी

अंबिकापुर।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बुधवार को प्रदेशव्यापी अटल विकास यात्रा के दौरान अम्बिकापुर विकासखण्ड के ग्राम भकुरा में सरगुजा विश्वविद्यालय परिसर में संत गहिरा गुरू की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने इस अवसर पर करीब 38 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले सरगुजा विश्वविद्यालय के नए भवन के निर्माण का शिलान्यास भी किया।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सरगुजा विश्वविद्यालय परिसर में सुगम आवाजाही के लिए 10 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण कराने के लिए 10 करोड़ रूपए की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज लखनपुर की छात्राओं की फीस माफ करने की घोषणा की तथा संत गहिरा गुरू शोधपीठ स्थापना की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने सरगुजा विश्वविद्यालय के नये भवन की आधारशिला रखने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया में संत गहिरा गुरू का नाम विख्यात है और उनके अनुयायी बड़ी संख्या में हैं। उन्होंने कहा कि संत गहिरा गुरू ने न केवल लोगों को संगठित किया, बल्कि खासकर आदिवासी और वनांचल के लोगों के बीच से सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का अनुकरणीय कार्य किया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि सरगुजा विश्वविद्यालय के परिसर में संत गहिरा गुरू की प्रतिमा स्थापित होने से यह विश्वविद्यालय संत गहिरा गुरू के ऊंचे आदर्शों को आगे बढ़ाने में और ऊंचाईयों को छूने लगेगा। उन्होंने कहा कि संत गहिरा गुरू ने समाज में यह संदेश दिया था कि चोरी-दारी, हत्या, मिथ्या त्यागे, सत्य-अहिंसा, दया, क्षमा धारें। डॉ. सिंह ने कहा कि एक लाईन में इतना सारगर्भित संदेश देना संत गहिरा गुरू जैसे व्यक्तित्व ही कर सकता है। उन्होंने कहा कि संत गहिरा गुरू शिक्षा ग्रहण करने के लिए किसी स्कूल में नहीं गए थे, लेकिन उनमें इतना ज्ञान था कि आज इस विश्वविद्यालय परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि संत गहिरा गुरू द्वारा स्थापित परंपराओं को आगे बढ़ाने में यह विश्वविद्यालय अपनी अहम भूमिका निभाए।

-सरकार ने की है गहिरा गुरू पर्यावरण पुरस्कार की घोषणा

उन्होंने कहा कि संत गहिरा गुरू को सन् 1986-87 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय समाज सेवा पुरस्कार और मरणोंपरांत विरसा मुण्डा पुरस्कार तथा शहीद वीरनारायण सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इनके नाम पर गहिरा गुरू पर्यावरण पुरस्कार की स्थापना भी की गई है।

उन्होंने कहा कि मानव जीवन में शिक्षा सबसे बड़ा महायज्ञ होता है, जिसमें संत गहिरा गुरू ने लोगों को जागरूक कर और सामाजिक कुरीतियों को दूर कर आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर परिसर में बरगद का पौध रोपन किया।

इस अवसर पर गृह मंत्री रामसेवक पैकरा ने कहा कि सरगुजा संभाग का यह विष्वविद्यालय संत गहिरा गुरू के आदर्शों को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में संत गहिरा गुरू की प्रतिमा स्थापित होने से उनके अनुयायियों में हर्ष व्याप्त है तथा पूरे आदिवासी समाज का मान-सम्मान बढ़ा है। इस अवसर पर संत गहिरा गुरू के पुत्र बभ्रू वाहन ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में संत गहिरा गुरू द्वारा किये गये कार्य और सनातन धर्म पर शोध करने से गिरे हुए व्यक्ति को कैसे ऊंचा उठाया जाए इसके लिए मार्गदर्शन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि संत गहिरा गुरू आश्रम की हीरक जयंती वर्ष में सरगुजा विश्वविद्यालय परिसर में संत गहिरा गुरू की प्रतिमा स्थापित होना हम सबके लिए गर्व की बात है।

इस अवसर पर सांसद कमलभान सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष फुलेश्वरी सिंह, कमिश्नर टामन सिंह सोनवानी, पुलिस महानिरीक्षक हिमांशु गुप्ता, कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर, पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार, अखिलेश सोनी, हस्तशिल्प विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अनिल सिंह मेजर, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के संचालक अखिलेश सोनी और गणमान्य नागरिक तथा विश्विद्यालयीन छात्र-छात्रायें तथा संत गहिरा गुरू आश्रम के विद्यार्थी तथा उनके अनुयायी उपस्थित थे।

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