सुखी तो सिर्फ राम के दास हैं : स्वामी ज्योतिर्मयानंद

सुखी तो सिर्फ राम के दास हैं : स्वामी ज्योतिर्मयानंद

रायपुर । संसार में कोई भी ऐसा नहीं हैं जो आपको निर्भय बना सके। भोग में रोग का भय है। कोई तन, कोई मन तो कोई धन के भय से भयभीत है।सुख-सुविधाएं जीवन में आनंद लेने के लिए है भोगने के लिए नहीं। ऐसे सारे लोग दुखी हैं जो अपने को परमात्मा से दूर किए हुए हैं। तीर्थ को आज संसार बना लिया है तो पाप कहां दूर होंगे। जीवन में अभयता देगा तो वैराग्य और सुख देगा तो केवल श्रीराम का सुमिरन। संसार में सुखी राम के दास ही है।

आर्शिवाद भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को स्वामी ज्योतिर्मयानंद गिरि ने प्रसंगवश श्रद्धालुओं को कहा कि संसारी जीव ने अपने चारो ओर भोग इकठ्ठा कर रखा है। न आहार में नियंत्रण-न व्यवहार में और न ही प्रजनन में। तन, मन, धन से भयभीत रोगी व्यक्ति को इनके खो जाने का भय हमेशा सताता रहता है। यदि ऊंचे कुल में जन्म भी ले लिया तो लगता है कोई गलत काम न कर बैठे, सुंदर व्यक्ति को असुंदरता का और धनवान को चोरी का भय बना रहता है।

सबसे बड़ी बात तो अनमोल है इस मनुष्य जीवन का मिलना जिसकी कीमत वह आज तक नहीं समझ पाया। शास्त्रों की माने तो देवताओं को भी मनुष्य जन्म नहीं मिलता। आपका देह कल्पवृक्ष है, इसलिए कहा गया है कि मनुष्य कर्म करने के लिए स्वतंत्र हैं इसके लिए कोई और बाध्य नहीं कर सकता। आप कितनी भी मंदिर बनवा लो, यज्ञ करवा लो, दान कर लो जो कर्म किया है उसका फल केवल आपको ही भोगना है। मनुष्य जीवन मुक्ति का साधन है।

उन्होंने आगे कहा कि, जो सुख सुविधाएं परमात्मा ने आपको दी है और आनंद लेने, परोपकार में लगाने, जरूरतमंदों की सहायता करने के लिए हैं भोग और विलासिता के लिए नहीं। इसीलिए तो आज इंसान दुखी है। तीर्थ को भी संसार बना लिए तो पाप कहां से दूर होंगे। वह भद्र के समान हो जाता है और बगैर भोगे नहीं छूटता चाहे सौ तीर्थ ही क्यों न कर लो। सुख की कल्पना हम और आप नहीं खोज सकते हैं। हमकों तो यह भी नहीं मालूम कि जहां मर रहे हैं वहीं अमृत है। देखने के लिए दृष्टि चाहिए। इसलिए जगत की जगह जगदीश को पकड़ लो,सुखी हैं तो केवल राम के दास।

समस्या से लड़ो-जगह बदलने या व्यक्ति से दूरी बना लेने से समस्या खत्म नहीं होती है। यह तो आपके पीछे ही जाएगी। इसलिए जहां पर खड़े हो वहीं धैर्यपूर्वक खड़े रहकर समस्या से लड़ो नहीं तो एक और समस्या पैदा हो जाएगी। समस्या को दूर नहीं कर पाये तो तनाव में आ जायेंगे और बुद्धि नष्ट हो जाएगी, यही व्यक्ति अपने को खत्म कर लेता है। इन सब विकारों का मार्ग सत्संग में बताया जाता है। जीवंत झांकियों के माध्यम से भी आज श्रीकृष्ण प्रसंग को कथा में प्रस्तुत किया गया।

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