राष्ट्रीय

नया साल 2018 हम सबके बीच आकर अपना खास वजूद बना लेगा

कोई नहीं जानता लेकिन हर कोई यह उम्मीद जरूर करता है

आज का रविवार जैसे ही अपने डैने समेटेगा, नया साल 2018 हम सबके बीच आकर अपना खास वजूद बना लेगा और पूरे साल भर पूरी ठसक के साथ हमारे बीच रहेगा। हर दिन अपनी मौजूदगी का अहसास कराने वाला 2018 क्या-क्या गुल खिलाएगा, कोई नहीं जानता लेकिन हर कोई यह उम्मीद जरूर करता है कि आने वाला साल 2017 से बेहतर हो.

हर किसी के जीवन में बीता साल 2017 खट्टे-मीठे लम्हे दे गया. हर कोई बीते साल के मीठे लम्हों को कम खट्टे लम्हों को याद कर दुखी होता है और इसलिए ऊपर वाले से दुआ करता है कि 2018 का हर दिन हर लम्हा हमारे लिए खुशियों का खजाना लेकर आए.

हमारे आपके बुजुर्ग कह गए हैं कि जैसा बोओगे वैसा पाओगे. अगर आपने अच्छे कार्य किए हैं तो आपका बुरा नहीं होगा. आपने अपने कर्मों के जरिए पाप किया है तो आपको कष्ट होंगे. आपने कार्य के माध्यम से पुण्य किए हैं तो आप सुखी रहेंगे. अब प्रश्न उठता है कि पाप क्या है और पुण्य क्या है? इस प्रश्न का उत्तर बहुत ही सरल और सहज है. महर्षि व्यास का नाम आपने सुना होगा. उन्होंने ही 18 पुराणों की रचना की है. इस संबंध में एक श्लोक प्रचलित है-

अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् | परोपकारय पुण्याय पापाय परपीडनम् ||

श्लोक का अर्थ स्पष्ट है – 18 पुराणों में व्यास ने दो ही बातें कही है. परोपकार ही पुण्य है और परपीड़ा पाप है. अतः यदि आपको पुण्य कमाना है तो परोपकार के लिए हमेशा तत्पर रहें ऐसा ना भी कर सके तो परपीड़ा से पाप तो ना कमाए. वास्तव में दूसरों को जानबूझकर पीड़ा पहुंचाने वाले न केवल पाप कमाते हैं बल्कि स्वयं ही पीड़ित रहते हैं.

इसलिए आइए इस नए वर्ष 2018 के आगमन और स्वागत के साथ संकल्प लें कि इस वर्ष हम दूसरों को पीड़ा पहुंचाने वाला कोई काम नहीं करेंगे और अच्छे कर्म के लिए तत्पर रहेंगे. परोपकार करने में संकोच नहीं करेंगे. पिछले साल 2017 में आप ऐसा न भी कर सके हों, गलतियां भी की हो तो कोई बात नहीं, “अब नहीं करेंगे” का संकल्प पर्याप्त है. वैसे भी बीति ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेई. आगे अर्थात भविष्य में आप अपने को सुधार लेते हैं तो ईश्वर आपके पिछले पापों का दंड कम कर देगा.

श्याम वेताल
संपादक

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