Happy Propose Day: आज है इश्क़ के इजहार का दिन, प्रपोज कर उन्हें बना ले अपना

वैलेंटाइन वीक शुरू हो चुका है और आज प्रोपोज़ डे है. रोज डे के बाद प्रोपोज़ डे आता है.

8 फरवरी को प्रोपोज़ डे मनाया जा रहा है, यानी इश्क के इजहार का दिन.

फरवरी का महीना आते ही लोगों को वैलेंटाइन डे का बेसब्री से इंतजार रहता है।

पश्चिमी देशों की संस्कृति का प्रतीक “प्रपोज डे” अब हमारे देश में भी मान्यता प्राप्त कर चूका है|

प्रेमी युगल इस दिन एक दुसरे को प्रपोज़ कर जीवन साथी बनने की अपनी इच्छा का इजहार करते है|

प्रपोज करने का पश्चिमी तरीका तो सभ्यता का लबादा ओढ़े रहता है|

प्रेमी अपनी प्रेमिका को अपने घुटने में बैठकर फुल देते हुए पूछता है “विल यू मैरी मी”|

प्रेमिका के लिए ये सुनना ऐसा लगता है मानो उसकी जन्मों की मुराद पूरी हुई है|

खुशी से उसकी आँखों से आंसू भी निकल आते है|

तो इंतजार की घड़ी हुई खत्म क्योंकि वैलेंटाइन वीक की शुरुआत हो चुकी है और रोज़ डे खत्म होते ही दूसरा दिन यानि प्रपोज डे चुका है।

इस दिन आम तौर पर गर्लफ्रेंड अपने बॉयफ्रेंड को या बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड को प्रपोज कर अपने दिल की बात का इजहार करता है।

अगर आप भी किसी से दिल से बेइम्तहां प्यार करते हैं तो इस दिन से बेहतरीन मौका आपको मिल नहीं सकता।

देरी किस बात की आज ही अपने प्यार को करें प्रपोज| यूं तो आमतौर पर प्रपोज करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता|

तो ऐसे माहौल में जब चारों तरफ फिजाओं में प्यार ही प्यार उमड़ रहा हो इस मौके को आपको मिस नहीं करना चाहिए।

अगर प्रोपोज़ डे के दिन सब सही रहता है तभी तो चॉकलेट डे 9 फरवरी, टेडी डे 10 फरवरी, प्रॉमिस डे 11 फरवरी, हग डे 12 फरवरी, किस डे 13 फरवरी और 14 फरवरी को वैलेंटाइन्स डे मना पाएंगे.

वैलेंटाइन्स डे के मौके पर शेरो शायरी बहुत काम आती है और शायरी के जरिये कम शब्दों में गहरी बात कही जा सकती है.

कम शब्दों में गहरी बात कहनी हो तो महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब से बेहतरीन शायर कोई दूसरा नहीं हो सकता. प्रोपोज़ डे पर शायरी का जबरदस्त इस्तेमाल किया जा सकता है.

14 तारीख को वैलेंटाइन डे आने वाला है इससे पहले ही आप उन्हें करें प्रपोज और बना लें उन्हें अपना।

वैलेंटाइन्स डे से पहले का अहम दिन प्रोपोज़ डे पर मिर्ज़ा ग़ालिब के 7 सबक

इश्क पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा

आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हंसी
अब किसी बात पर नहीं आती

आता है दाग़-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद
मुझ से मिरे गुनह का हिसाब ऐ ख़ुदा न माँग

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के

इश्क से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया

 

 

 

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