हरि बोलो हरि बोलो के जय घोष से गुंजायमान रहा जगदलपुर

भगवान जगन्नाथ की रथ परिक्रमा को देखने उमड़ी भीड़, तीन रथों में 27 विग्रह हुए विराजमान

–अनुराग शुक्ला

जगदलपुर: उड़ीसा के पूरी धाम की तरह बस्तर संभाग मुख्यालय में विगत् 609 वर्षों से रथ यात्रा किया जा रहा है. इसी तारतम्य में जगदलपूर में रथ यात्रा निकाली गई. बस्तर में रथयात्रा के दौरान बांस से बनी तुपकी से आमजन भगवान को सलामी देते हैं. ज्ञात हो कि पूरे भारत में रथ यात्रा निकाली जाती किंतु बस्तर में सबसे अलग ढंग से यह मनाया जाता है!
बस्तर में राजशाही काल के दौरान से ही यह प्रथा चली आ रही है और इस प्रथा में बस्तर के आदिवासियों के साथ-साथ आरण्यक ब्राह्मण समाज की विशेष भूमिका रहती है! आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकाली जाने वाली रथ यात्रा में 3-3 रथ नगर की परिक्रमा करते हैं इस रथ में भगवान जगन्नाथ के साथ भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को भी रथारूढ़ किया जाता है! ब्राह्मण समाज के 90 गांव में निवासरत् लोगों की अलग-अलग जवाबदारी रथ संचालन के दौरान होती है और तीन रथों में 27 विग्रहों को बिठाकर नगर की परिक्रमा कराई जाती है जिसको देखने शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेते हैं!

पीली धोती और कुर्ता धारण कर किया गया रथ संचालन

आरण्यक ब्राह्मण समाज के लोगों ने पीली धोती और कुर्ता धारण कर भगवान के रथ को श्री मंदिर से निकालकर रथारूढ़ किया रथ की परिक्रमा तक की प्रक्रिया समाज के लोगों ने निभाई और इस दौरान हरि बोलो के जय घोष से नगर गुंजायमान रहा!

राजा ने लगाया रथ के सामने झाड़ू

पुरानी परंपरा के अनुसार भगवान के रथारूढ़ करने के बाद रथ परिक्रमा से पहले राज परिवार के सदस्य मंदिर के सामने भगवान की पूजा अर्चना करते हैं और चांदी के झाड़ू से रथ के सामने बुहार कर रथ परिचालन की अनुमति देते हैं यह भूमिका बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव द्वारा अपनाई गई इस दौरान राज परिवार से जुड़े जमीदार राजगुरु और पुजारी भी मौजूद थे!

सिरासार में 9 दिन विराजेंगे जगरनाथ

भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथारूढ़ होकर नगर परिक्रमा के लिए निकले हैं रथारूढ़ की परिक्रमा खत्म होने के बाद जनकपुरी में 9 दिनों तक विश्राम कर अन्य श्रद्धालुओं को दर्शन लाभ देंगे!

10-10 गांव के लोग लगाएंगे प्रतिदिन भोग

गोंचा महापर्व के दौरान सोमवार से 9 दिनों तक 90 गांव के लोगों द्वारा अमानत भोग लगाएंगे इसके लिए 10-10 गांवों को जवाबदारी दी गई है! 10-10 गांव के लोग स्वयं के संसाधन से यह प्रक्रिया निभाते हैं किंतु महत्वपूर्ण बात यह है कि गांव के लोगों के द्वारा बनाए गए भूख को स्थानीय पंडितों द्वारा भगवान के पास अर्पण किया जाता है!

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