हानिकारक केमिकल और राखड़ से सराबोर हसदेव, खतरे में है अस्तित्व

कोरबा में स्थापित उद्योगों की वजह से नदी की अविरल धारा लगातार प्रदूषित हो रही है

कोरबा। कोरिया से उद्गम के समय अविरल बहने वाली हसदेव नदी छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदियों में से एक है मगर अब इस जीवनदायिनी नदी के जीवन पर ही खतरा मंडराने लगा है।

कोरबा के गोपालपुर से लेकर उरगा तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में हसदेव नदी बेहद ही खतरनाक तरीके से प्रदूषित हो रही है इससे जहां नदी में हानिकारक केमिकल और राखड़ मिल रहे हैं तो वहीं नदी में ऑक्सीजन की मात्रा भी खत्म हो रही है जिसका असर नदी के अस्तित्व पर भी पड़ रहा है।

एनजीटी की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि कोरिया से कोरबा पहुंचते तक हसदेव नदी काफी अविरल है मगर जैसे ही वह कोरबा के गोपालपुर पहुंचती है यहां से लेकर उरगा तक प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ जा रही है इसका बड़ा कारण कोरबा में स्थापित उद्योगों को माना जा रहा है।

दरअसल हसदेव नदी से इन उद्योगों को पानी की आपूर्ति तो की जाती है साथ ही साथ उद्योगों से निकलने वाला खतरनाक केमिकल और राखड़ नदी में मिलता है जिसके कारण नदी तेजी से प्रदूषित हो रही है।

अलग-अलग प्लांटो के जरिए नियमों की अनदेखी कर हानिकारक अपशिष्ट नदी में मिलाया जाता है जिससे ऑक्सीजन की कमी नदी में हो रही है और नदी में रहने वाले जीव जंतु भी खत्म हो रहे हैं।

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