कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर क्या आप भी है उलझन में, तो पढ़े ये पूरी खबर

कृष्ण के जन्म दिवस को हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के तौर पर मनाते है

मान्यता है कि द्वापर युग के अंतिम चरण में भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसी कारण शास्त्रों में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के दिन अद्र्धरात्रि में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने का उल्लेख मिलता है।

भारत नहीं समूचे विश्व में धूमधाम से मनाते हैं

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर मनाया जाने वाला पावन पर्व जन्माष्टमी भारत भूमि पर मनाया जाने वाला ऐसा त्यौहार है जिसे अब सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में कई स्थानों पर बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

भारतीय धर्म-शास्त्रों में एक बात कही गई है कि जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में जन्म लेते हैं और पापों से विश्व को मुक्त करवाते हैं।

कृष्ण ने धरती को कंस नामक पापी राक्षस से दिलाई मुक्ति

इसी तरह द्वापर युग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लेकर धरती को कंस नामक पापी राक्षस से मुक्ति दिलाई थी। भगवान कृष्ण के जन्म दिवस को ही हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के पर्व के तौर पर मनाया जाता है।

दो दिन मनाई जाएंगी जनमाष्ट्रमी<

इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी रात 8 बजकर 47 मिनट से आरंभ होकर अगले दिन 3 सितंबर की रात 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगी।

2 सितंबर को स्मार्त पंथ से संबंध रखने वाले कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाएंगे और 3 सितंबर को वैष्णव संप्रदाय कृष्ण जन्मोत्सव का जश्न मनाएंगे। गृहस्थ 2 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करेंगे।

ताज़ा हिंदी खबरों के साथ अपने आप को अपडेट रखिये, और हमसे जुड़िये फेसबुक और ट्विटर के ज़रिये

Back to top button