कम्प्यूटर या लैपटॉप पर बीत रहा है अधिक समय तो हो सकता है ये सिंड्रोम

लाइफ स्टाइल डेस्क : यदि आप जरूरत से ज्यादा इन चीजों पर काम करते हैं तो कंधे, पीठ की तकलीफ आपको हो सकती है। लेकिन चूंकि इस वक्त इन चीजों पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता है, इसलिए इससे किसी भी तरह से बचाव नहीं हो सकता है।

नई तकनीक नई तरह की समस्याएं लेकर आती हैं। कम्प्यूटर-लैपटॉप से जीवन सरल तो हुआ लेकिन इससे कई तरह की स्वास्थ्यगत समस्याओं ने भी सिर उठाया है।

अगर आप भी 6-7 घंटे से ज्यादा समय कम्प्यूटर या लैपटॉप पर बिता रहे हैं तो आप भी सतर्क हो जाएं क्योंकि इसके चलते आपके हाथों की कलाइयों और उंगलियों में दर्द हो सकता है।

कई बार लगातार की-बोर्ड और माउस के इस्तेमाल से कलाइयों में दर्द होता है। साथ ही कभी उंगलियां भी दर्द करने लगती है जिससे रोजाना के कामों में दिक्कत आती है।

अगर ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो आप कार्पल टनल सिंड्रोम की जद में हैं। कार्पल टनल सिंड्रोम में रोगी के हाथों में सूजन रहती है, हथेली से लेकर कोहनी तक दर्द रहता है।

हाथ कई बार उनके सुन्न होने का अनुभव भी होता है।किसी भी चीज को हाथों से उठाने और पकड़ने में दिक्कत होती है। चीजें हाथों से छूटने लगती हैं और कलाइयां अक्सर दर्द करती हैं।

हार्मोंस में बदलाव के कारण भी देखने को मिलती है लेकिन ज्यादातर मामलों में ये लंबे समय तक हाथों और उंगलियों का की-बोर्ड पर इस्तेमाल के चलते होता है। लंबी दूरी ड्राइविंग के बाद भी कलाइयों में दर्द महसूस होता है।

कार्पल टनल सिंड्रोम बचने के लिए कसरत करना एकमात्र समाधान है। रोजाना कलाइयों और उंगलियों से जुड़ी एक्सरसाइज करें। कुर्सी पर बैठे हुए कलाईयों को क्लॉक वाइज और एंटी क्लॉक वाइज घुमाए।

– अगर लंबी दूरी तक ड्राइव करने वाले हैं तो स्टियरिंग व्हील या हैंडल पर आपकी ग्रिप थोड़ी ढीली रखें ताकि कलाइयों पर ज्यादा दबाव नबने।

– काम के बीच-बीच में हाथ और उंगलियों को आराम देते रहें। लगातार काम ना करें।

– काम करते समय गर्दन और कमर सीधे रखें।

– की-बोर्ड की ऊंचाई पर ध्यान दें।

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