‘‘चिरायु‘‘ के तहत 2.12 लाख बच्चों की स्वास्थ्य जांच : आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई

अम्बिकापुर : राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरूआत सरगुजा जिले में 15 जुलाई 2014 को की गई। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम कोे ‘‘चिरायु‘‘ के नाम से भी जाना जाता है। कलेक्टर किरण कौशल के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के 2 लाख से अधिक बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराते हुए आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। इस कार्यक्रम का उद्देष्य शून्य से 18 वर्ष के बच्चों का चार चरणों में स्क्रीनिंग किया जाता है। बच्चों में 35 तरह की बीमारियों का ‘‘चिरायु‘‘ में इलाज का प्रावधान है। जांच में पाई गई बीमारी के उपचार हेतु छत्तीसगढ़ एवं देश के 100 से अधिक उच्च संस्थानों में बच्चों को भेजा जाता है। जिनमें शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी चिकित्सालय शामिल है।

जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एन.के. पाण्डेय ने बताया है कि वर्तमान में सरगुजा जिले के समस्त आंगनबाड़ी केन्द्र, स्कूल, मदरसा और हॉस्टल का कव्हरेज किया जा रहा है। इसके तहत 420 गावों में 1 हजार 540 आंगनबाड़ी और 1 हजार 14 विद्यालयों के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। जांच में 2 लाख 12 हजार 732 बच्चों का स्क्रीनिंग किया गया।

नताशा को हृदय रोग से मिला निजात
मैनपाट विकासखण्ड अन्तर्गत ग्राम जमढ़ोढ़ी के प्राथमिक शाला में पढ़ने वाली 8 वर्षीय नताशा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी। ‘‘चिरायु‘‘ दल के द्वारा 12 अप्रैल 2017 को देखा गया। तत्पष्चात् मेडिकल कॉलेज में 20 अप्रैल 2017 को बीमारी का डायग्नोसिस किया गया। जिसका सम्पूर्ण इलाज ‘‘चिरायु‘‘ दल के माध्यम से रायपुर के एमएमआई हॉस्पिटल में पूर्ण कराया गया। वर्तमान में नताशा पूर्णतः स्वस्थ है, जिससे उसके जीवन तथा परिवार में खुशहाली है।

दृष्टिदोष से मुक्त हुई ईष्वरिया
अम्बिकापुर विकासखण्ड अन्तर्गत आठवीं कक्षा पढ़ने वाली ईष्वरिया को ठीक से दिखाई नहीं देता था। वह ब्लैक बोर्ड को 2 सेंटीमीटर की दूरी पर ही देख सकती थी, किन्तु चिरायु दल के द्वारा स्कूल के निरीक्षण के दौरान ईष्वरिया की जांच की गई जांच के उपरांत यह पाया गया कि बालिका को दृष्टिदोष है। इस बालिका को उचित इलाज हेतु मेडिकल कॉलेज अम्बिकापुर लाया गया, जहां उसका सम्पूर्ण जॉंच एवं उपचार दवाइयां तथा चष्मा निःशुल्क प्रदाय किया गया। अब ईष्वरिया पूर्णतः स्वस्थ है एवं वह अपनी दैनिक दिनचर्या का काम ठीक तरह से कर पा रही है।

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