छत्तीसगढ़

सीएम के आदेश को ठेंगा दिखाकर लीपापोती में जुटा स्वस्थ्य महकमा

कवर्धा । सीएम के गृह जिले में दवा खरीदी फर्जीवाड़े में फंसे सीएमएचओ को बचाने के चक्कर में स्वस्थ्य महकमें ने मुख्यमंत्री के आदेश को भी ठेंगा दिखा दिया । यहां जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही है और
स्वास्थ्य सचिव स्वास्थ्य कमिश्नर और संचालक कार्यालय सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाने में मस्त हैं । मामले का खुलासा होने के बाद आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं डॉ आर प्रसन्ना ने कहा कि संचालक स्वास्थ्य सेवाएं से बात करने की आवश्यकता है । मुझे लगता है संचालक स्तर पर इसकी जांच हुई है । रिटायर्ड संभगीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ जी के सक्सेना ने कहा कि अब मैं रिटायर हो चुका हूं अब उस मामले में कुछ नही कहूंगा ।
फर्जीवाड़े के जिम्मेदार को ही सौंपा जांच का जिम्मा : मजेदार बात तो ये है कि जिस सीएमएचओ के कार्यकाल में निविदा निकाली गई, उसे ही संभागीय संयुक्त संचालक के पद पर रहते हुए रिटायरमेंट होने के ठीक पहले जांच का जिम्मा सौंपा गया। इस सीएमएचओ डॉ अखिलेश त्रिपाठी की खरीदी घोटाला की शिकायत हुई, उसी को खुद की जांच कर जांच प्रतिवेदन भेजने का फरमान जारी कर दिया । लगे हाथ पत्र में संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रायपुर की और से 5 अगस्त और 18 अगस्त 2017 को सीएमएचओ कबीरधाम को लिखे पत्र की कॉपी हाथ लगी है, जिससे मामले का खुलासा हुआ । पत्र में संभगीय संयुक्त संचालक ने रिटायरमेंट के ठीक पहले अपने अधीनस्थ अधिकारी और स्वयं की और से भी की गई दवा खरीदी घोटाले में संलिप्तता को छुपाने सीएमएचओ कबीरधाम को उक्त तिथियों में पत्र लिखा है कि संचालक स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ ने संदर्भित पत्र के साथ शिकायत कर्ता का आवेदन इस कार्यालय को प्रेषित कर 3 दिवस के भीतर बिंदुवार जांच कर जांच प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए है । निर्देश के पालन में संचालनालय से प्राप्त मूल आवेदन आपको उपलब्ध किया जाता है ।निर्देशित किया जाता है कि आप अवलोकन कर बिंदुवार जांच कर जांच प्रतिवेदन 3 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से स्टोर प्रभारी लिपिक के हस्ते भेजना सुनिश्चित करें ताकि जांच प्रतिवेदन संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं को भेजा जा सके । तो वहीँ संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रानू साहू ने कहा कि हमारे जॉइंट डाइरेक्टर ने जांच की है आप जिले के कलेक्टर और सी ईओ जिला पंचायत से शिकायत कर दीजिये और उनसे कह कर अभ्यावेदन भेजवा दीजिये हम कार्यवाही कर देंगे । ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि क्या विभाग अब तक क्या कर रहा था ?
सेवानिवृत्ति के पहले ही सीएमएचओ ने कर लिया अपना बचाव : इस पत्र से तो यही लगता है कि अधिकारी ने रिटायरमेन्ट के ठीक पहले अधिकारी को बचाने सारे जतन कर लिए हैं । ऐसे में सवाल तो यही है कि क्या स्वस्थ्य विभाग के अधिकारियों को मुख्यमंत्री के आदेश की भी परवाह नहीं है ?

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