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KBC में रायपुर की नीला बुद्धदेव की कहानी सुनकर अमिताभ क्यों हुए भावुक

26 अक्टूबर को पचास लाख रुपये जीतने वाली छत्तीसगढ़ के रायपुर की निवासी नीला बुद्धदेव के जीवन संघर्ष की कहानी सुनकर होस्ट अमिताभ बच्चन काफी भावुक हो गए।

नई दिल्ली। लोकप्रिय गेम शो कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) में 26 अक्टूबर को पचास लाख रुपये जीतने वाली छत्तीसगढ़ के रायपुर की निवासी नीला बुद्धदेव के जीवन संघर्ष की कहानी सुनकर होस्ट अमिताभ बच्चन काफी भावुक हो गए।

खासकर, बुद्धदेव ने जब अपने रोमांस के किस्से को बयान किया तो बिग बी को कहना पड़ा कि आज की पीढ़ी इसे शायद समझ ही नहीं पाएगी।

नौवीं क्लास से ही घर को सहारा

केबीसी के 10वें सीजन में हॉट सीट पर देश के कोने-कोने से आए कई प्रतिभागियों के जीवन की कहानी काफी कारूणिक रही।

मसलन, इस सीजन में पहली बार एक करोड़ रुपये जीतने वाली असम की बिनीता जैन के पति को उग्रवादी उठा ले गए थे और उनका आज तक कोई पता नहीं चला।

इसी तरह, नीला बुद्धदेव के जीवन में भी दुखों के पहाड़ टूटते रहे लेकिन अपने जीवट के दम पर उन्होंने हर मुश्किल का सामना किया। जब वे नौवीं क्लास में थी, जब से ही परिवार को सहारा देने के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था।

नीला जब स्टूडेंट थी तभी एक-एक कर उनके तीन भाइयों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया, लेकिन नीला ने हिम्मत नहीं हारी। खुद को तो संभाला ही अपने बुजुर्ग माता-पिता का भी भरपूर ख्याल रखा।

पत्र मित्रता से हुई पति से मुलाकात

उन्होंने बिग बी के साथ बातचीत में बताया कि उन्हें रेडियो सुनने का बहुत शौक था। इसी क्रम में एक दिन रेडियो कार्यक्रम में पाठकों के पत्र पढ़े जा रहे थे।

उनमें से भरत पी बुद्धदेव का पत्र भी शामिल था जिन्होंने `मधुबन खुशबू देता है` गाने की फरमाइश की थी। उनकी इस फरमाइश के आधार पर ही नीला ने उन्हें पत्र लिखने का फैसला किया और फिर यह सिलसिला अगले छह साल तक चलता रहा।

पहली बार छह साल बाद मिले

भरत पी बुद्धदेव के साथ छह साल तक पत्र मित्रता चलती रही। इस बीच उनके एक भाई की मौत की खबर सुनकर भरत उनसे मिलने पहुंच गए।

छह साल में पहली बार दोनों ने एक दूसरे को देखा। इसके बाद तीन का समय और गुजर गया। इसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया।

इस पर अमिताभ बच्चन को कहना पड़ा कि आज की पीढ़ी को शायद यह प्यार समझ में न आए जो छह साल तक एक-दूसरे को देखे बिना जवान होता रहा।

बेटे को लेकर भी किया संघर्ष

शादी के तीन साल बाद बेटा हुआ। कुछ दिनों के बाद ही समझ में आने लगा कि उसकी आंखों में कोई समस्या है। डॉक्टरों को दिखाया तो बताया गया कि उनका बेटा कभी ठीक नहीं हो पाएगा और उन्हें उसके सामान्य जीवन के बारे में सोचना छोड़ देना चाहिए।

यह सुनकर किसी मां पर क्या गुजरी होगी, इसका सहज की अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके बावजूद नीला ने हार नहीं मानी और आज उनका बेटा आइआइटी ग्रेजुएट है। पिछले 35 साल से ट्यूशन पढ़ा रही नीला को अपने पति पर भी बहुत नाज है।

माता-पिता को अपने साथ रखा

चूंकि नीला के तीनों भाइयों की काफी पहले मौत हो चुकी थी, इसलिए वह शुरुआत में शादी करने के खिलाफ थी। उन्होंने मन ही मन तय कर लिया था कि आजीवन माता-पिता की सेवा करेंगी।

लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी भरत पी बुद्धदेव से शादी हुई और वे इतने अच्छे इनसान हैं कि एक बार कहने पर ही उनके माता-पिता को अपने साथ रखने पर राजी हो गए। नीला के माता-पिता मृत्य पर्यंत उनके साथ ही रहे।

एक करोड़ के सवाल पर किया क्विट

नीला बुद्धदेव से एक करोड़ रुपये के लिए सवाल किया गया कि `वी नेहरूज` पुस्तक के लेखक कौन हैं। इसके लिए दिए गए चार विकल्पों में अरुण नेहरू, विजयलक्ष्मी पंडित, इंदिरा गांधी और कृष्णा हठीसिंह के नाम दिए गए।

हालांकि उनके पास जोड़ीदार के रूप में एक लाइफलाइन थी लेकिन जोड़ीदार के रूप में आए उनके पति भरत पी बुद्धदेव को भी इसका जवाब नहीं मालूम था। इसलिए, नीला ने गेम क्विट कर दिया और 50 लाख रुपये जीत लिए। अमिताभ बच्चन ने बताया कि इस पुस्तक की लेखिका कृष्णा हठीसिंह हैं।

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