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रेल परियोजनाओं के लिए मदद, भारत बांग्लादेश को 10 रेल इंजन कल सौंपेगा

केंद्र सरकार ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि इन सभी का काम निर्धारित समय पर पूरा होनी चाहिए।

नई दिल्ली। यह बात तो जगजाहिर है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश पिछले कुछ दिनों से भारत से नाराज है। ऐसे में भारत सरकार पीएम शेख हसीना की सरकार की इस नाराजगी को दूर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। सोमवार को बांग्लादेश को ब्राडगेज की 10 लोकोमोटिव सौंपना भी भारत की इसी कोशिश का नतीजा है। भारत ने पिछले कुछ वर्षो में बांग्लादेश में सड़क, रेल व पोर्ट विकास के लिए कई परियोजनाओं को मदद दे रहा है। केंद्र सरकार ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि इन सभी का काम निर्धारित समय पर पूरा होनी चाहिए।

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h3>विदेश मंत्री एस जयशंकर, रेल मंत्री पीयूष गोयल वर्चुअल कार्यक्रम में शिरकत करेंगे

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विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 10 ब्राडगेज लोकोमोटिव सौंपने से बांग्लादेश रेलवे की शक्ति में काफी वृद्धि होगी। 27 जुलाई, 2020 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर, रेल और वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भारत की तरफ से अगुवाई करेंगे। बांग्लादेश के रेल मंत्री मो. नुरूल इस्लाम सुजन और विदेश मंत्री अबु कलाम अब्दुल मेमन इसमें शिरकत करेंगे।

बैठक में रेल परियोजनाओं की होगी समीक्षा

भारत व बांग्लादेश की मित्रता में रेलवे की अहमियत का पता इस बात चलता है कि अभी भारत की मदद से बांग्लादेश में 2.44 अरब डॉलर की मदद से 17 रेलवे परियोजनाओं पर काम चल रहा है। बैठक में भारत की तरफ से चलाई जाने वाली बाकी रेल परियोजनाओं की समीक्षा भी होगी। भारत की तरफ से 2.44 अरब डॉलर की जो मदद रेल परियोजनाओं के लिए दी जा रही है उसे महज एक फीसद ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। पड़ोसी देश को इसे 20 वर्षं में चुकाना है और पांच वर्षो की मोरोटोरियम भी है। इनमें से 9 परियोजनाओं काम पूरा हो चुका है।

भारत बांग्लादेश की नये डबल गेज लाइन बिछाने में भी मदद कर रहा है

7.8 करोड़ डॉलर की लागत वाली कुलौरा-शाहबाजपुर और 40 करोड़ डॉलर की लागत वाली खुलना-मोंगला रेल परियोजना का काम 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा भारत वहां एक मीटर गेज लाइन को डबल गेज लाइन में और नये डबल गेज लाइन बिछाने में भी मदद कर रहा है।

भारत व बांग्लादेश के बीच दो पैसेंजर ट्रेनों का संचालन कोरोना की वजह से बंद है

सनद रहे कि भारत व बांग्लादेश के बीच अभी दो पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होता है, लेकिन इनका संचालन कोविड की वजह से बंद है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी देशों को मदद करने के लिए वह चीन के वनस्पति अलग अवधारणा पर काम कर रहा है। बांग्लादेश सरकार की तरफ से जो परियोजनाएं प्रस्तावित की जाती हैं उन्हें भी मदद देने पर विचार होता है।

पड़ोसी देशों पर भारत अपनी मर्जी नहीं लादता

पड़ोसी देशों पर भारत अपनी मर्जी नहीं लादता और ना ही सिर्फ अपने फायदे वाली परियोजनाओं को आगे बढ़ाता है और ना ही इन्हें कर्ज के जाल में पहुंचाने की कोशिश की जाती है। बांग्लादेश पर ज्यादा फोकस देने के पीछे एक कारण यह भी है कि पीएम शेख हसीना की सरकार सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दों को लेकर बहुत सहज नहीं है। पीएम हसीना ने कुछ महीने पहले एक मीडिया साक्षात्कार में इस नाराजगी को जता चुकी हैं। बांग्लादेश से भारत के रिश्ते पिछले एक दशक से लगातार मजबूत हो रहे हैं। रेल परियोजनाओं के अलावा भारत ने इस पड़ोसी देश को ऊर्जा क्षेत्र में कई तरह की मदद देने पर काम कर रहा है।

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