अस्पताल में लाचार प्रबंधन, घायल बेटे के साथ ग्लूकोज की बॉटल हाथ में लेकर भटकता रहा पिता

परिजनों को स्वयं ही वार्ड ब्वाय का काम करने के लिए विवश किया जाता है।

बैतूल। जिला अस्पताल में लाचार प्रबंधन के कारण मरीजों और उनके परिजन को खासी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से उपचार की उम्मीद में पहुंचने वाले मरीज और उनके परिजनों को स्वयं ही वार्ड ब्वाय का काम करने के लिए विवश किया जाता है।

कई बार शिकवा शिकायतों के बाद भी अस्पताल प्रबंधन के रवैये में रत्तीभर भी बदलाव नहीं आ सका है।

गुरुवार की शाम करीब 7 बजे पेड़ से गिरकर घायल हुए अपने बेटे का एक्सरे कराने से लेकर उसे वार्ड में भर्ती करने के लिए पिता परेशान भटकता रहा। हद तो तब हो गई जब प्लास्टर करने के बाद उसे वार्ड क्रमांक 5 में भर्ती कर दिया गया और सलाइन बॉटल लगा दी गई।

इसके बाद एक्सरे और मरीज को लेकर आपरेशन थियेटर जाने का आदेश नर्स के द्वारा दे दिया गया।

इसके चलते पिता नामू आदिवासी ने अपने 13 साल के घायल बेटे बबलू को लगाई गई सलाइन बॉटल एक हाथ में थामी और दूसरे हाथ में उसकी पर्ची और एक्सरे लेकर आपरेशन थियेटर की ओर चल पड़ा। घायल मरीज को परीक्षण कराने ले जाने के लिए न तो नर्स ने ग्लूकोज की बॉटल के खत्म हो जाने का इंतजार किया और न ही किसी वार्ड ब्वाय को जिम्मेदारी सौंपी।

पिता और घायल पुत्र जैसे-तैसे ऑपरेशन थियेटर पहुंचे और इंतजार के बाद चिकित्सक से परीक्षण कराकर वापस वार्ड आए। इस दौरान अस्पताल के कर्मचारी मूकदर्शक बनकर देखते रहे।

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