बड़ी खबरराजनीतिराज्यराष्ट्रीय

हेमंत सोरेन ने अपने मजदूरों को विमान से वापस बुलाया,बोले-घबराओ मत

राज्य की जनता के जान-माल की जिम्मेदारी हमारी

रांची, – झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लद्दाख में फंसे अपने राज्य के मजदूरों को आज विमान से वापस बुलाया है |

एक महिला ने श्री सोरेन को अपने फंसे होने की जानकारी दी थी जिसके बाद उन्होंने लद्दाख से दिल्ली और दिल्ली से रांची तक के विमान की व्यवस्था करायी,इसके लिए सरकार की तरफ से 8 लाख रुपये खर्च किये गए है

मुख्यमंत्री ने राज्य में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या से प्रदेशवासियों को न घबराने की अपील करते हुए शुक्रवार को कहा कि आम लोगों की जानमाल की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए यदि लॉकडाउन बढ़ाने की जरूरत पड़ी तो उसे भी बढ़ाया जायेगा।

श्री सोरेन ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले कुछ सप्ताह के दौरान प्रदेश में प्रवासी मजदूरों की वापसी से संक्रमितों की संख्या में हो रही वृद्धि का आभास सरकार को पहले से था। संक्रमितों की संख्या को लेकर सरकार तनिक भी हतोत्साहित नहीं है। इस बात को ध्यान में रख कर ही हर कदम उठाये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, ” अगले दो-चार दिनों में संक्रमण की गति या उसके ठीक होने के व्यवहार में जो बदलाव होता है, उसके अनुरूप निर्णय लेंगे। यदि लॉकडाउन बढ़ाने की जरूरत पड़ी तो उसे भी बढ़ाएंगे। क्योंकि हम कोई हड़बड़ी में नहीं हैं। पहले आम लोगों की जानमाल की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

प्रवासियों को झारखंड भेजने में मदद

श्री सोरेन ने कहा कि हर प्रवासी की वापसी के लिए लगातार प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधन के अनुरूप प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए हर तरह प्रयास कर रही है। अब तक करीब चार लाख लोग अपने राज्य में वापस आ चुके हैं। फिर भी काफी संख्या में प्रवासी ऐसे क्षेत्रों में फंसे हैं, जहां सामान्य आवागमन की सुविधा नहीं है। फिर भी सरकार उन्हें लाने में लगी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार देश के अन्य प्रांतों की सरकार से भी आग्रह कर रही है कि जल्द से जल्द वे प्रवासियों को झारखंड भेजने में मदद करे। क्योंकि डर-भय का माहौल है। मानसिक तनाव में लोग मर रहे हैं। आने का क्रम जितना जल्द खत्म होगा, उतना ही राज्य के लिए बेहतर होगा।

श्री सोरेन ने कहा कि अन्य राज्यों से आने वाले मजदूरों को उनके क्षेत्र में ही रोजगार उपलब्ध हो, इसके लिए कई योजनाएं शुरू की जा चुकी हैं। पांच लाख लोगों को इससे जोड़ने की कोशिश हो चुकी है। लक्ष्य दस लाख तक करने की है। खेती-बारी शुरू होने से भी रोजगार मिलेगा। इसके अलावा जरूरत के अनुरूप उन क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर विचार किया जा रहा है।

Tags
Back to top button
%d bloggers like this: