छत्तीसगढ़

हाई कोर्ट ने दिया आदेश, बार कौंसिल शीघ्र अधिवक्ता कल्याण समिति के साथ बैठक करे, रिपोर्ट प्रस्तुत करे

याचिकाकर्ता की तरफ से संदीप दुबे एवं स्टेट बार कौंसिल की तरफ से सौरभ पांडेय उपस्थित हुई

बिलासपुर –आज उच्च न्यायालय में माननीय डिवीज़न बेंच मुख्यनायधिपति जस्टिस पी आर मेनन एवं जस्टिस पी पी साहू ने राजेश केशरवानी, आनंद मोहन तिवारी की जनहित याचिका की सुनवाई हुई, जिसमे याचिकर्ता ने बार कौंसिल से वकीलों को इस कोरोना महामारी कॉल में सहायता की मांग की है, जिसमे याचिकाकर्ता की तरफ से संदीप दुबे एवं स्टेट बार कौंसिल की तरफ से सौरभ पांडेय उपस्थित हुई,

माननीय न्यायालय ने प्रारम्भ में ही स्टेट बार कौंसिल के वकील से पूछा की पिछले आर्डर के परिपालन में क्या किये, तब उनके अधिवक्ता ने बताया की 6 जुलाई से कुछ दिनों के लिए हाई कोर्ट का बैंक बंद होने के कारण, सामान्य निधि में जमा फिक्स डिपाजिट को तोड़वा नहीं पाने की वजह से 20 प्रतिशत राशि वकीलों को जारी नहीं की जा सकी, और बताया की 300 के करीब वकीलों को सहायता और दी गयी है, और बताया की 79 बार एसोसिएशन से सुझाव मांगे है,

याचिकर्ता के वकील संदीप दुबे ने पुनः न्यायालय को अवगत करवाया की स्टेट बार कौंसिल ने अभी तक अधिवक्ता कल्याण समिति की बैठक कर सहमति नहीं दी है, जहा पर वकीलों द्वारा ख़रीदे जाने वाले टिकट का करीब 4 करोड़ जमा है, जबकि अधिवक्ता कल्याण अधिनियम 1982 की धारा 15 के अनुसार ट्रस्टी कमिटी को बार कौंसिल से मिलकर ऐसे संकट के समय वकीली की मदद के लिए नियम बनाना है,

आज 20 साल से नियम नहीं बनायीं गयी, बिना नियम के पैसे बाट रहे है, जबकि मध्यप्रदेश में यह नियम बनायीं गयी है, स्टेट बार को ऐसे समय में ट्रस्टी कमिटी के साथ मिलकर नियम बनाने चाईए और ये 4 माह से बिना नियम के पैसे दे रहे है,

बार एसोसिएशन से जरुरी नहीं पूछना, ये देर करने के तरीके है, जहा हमारा टिकट का पैसा जमा है, वहा स्पष्ट रूप से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है, बता दे की अधिवक्ता कल्याण अधिनियम 1982 के तहत ट्रस्टी कमिटी का चेयरमैन विधि मंत्री एवं मेंबर सेक्रेटरी विधि सचिव होते है और बार कौंसिल के मेंबर सदस्य होते है,

पिछले बैठक में बार कौंसिल ने ट्रस्टी कमिटी को पैसा जारी नहीं करने कहा था, इसलिए अधिवक्ता कल्याण से राशि नहीं निकाल पा रही, जबकि ये कल्याण टिकट का पैसा है वकीलों का पैसा है, बार कौंसिल का बैठक न करने से राशि नहीं निकल पा रही है,

आनंद मोहन ने कहा की उसने योजना बना कर बार कौंसिल और अधिवक्ता कल्याण कमिटी को दी है, उसे भी देखा जाये, सुनवाई के पश्चात माननीय डिवीज़न बेंच मुख्यनायधिपति जस्टिस पी आर मेनन एवं जस्टिस पी पी साहू ने आदेश दिया की बार कौंसिल 2 हफ्ते के भीतर ट्रस्टी कमिटी के साथ बैठक करके धारा 15 अधिवक्ता कल्याण अधिनियम 1982योजना बनाये एवं अधिवक्ता कल्याण का पैसा जारी करवा कर जरुरत मंद वकीलों को देवे, साथ ही साथ याचिकर्ता द्वारा दी गयी योजना को भी गौर करे, इस बिच राज्य भी जानकारी देवे.

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