हाई कोर्ट ने शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने दिया आदेश

छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के पक्ष में आया युगलपीठ का फैसला, कर्मचारियों को लगा झटका

ब्यूरो चीफ विपुल मिश्रा
बिलासपुर : 22 साल पूर्व नियुक्त शिक्षाकर्मियों के संविलियन होने के बाद अब उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने के बजाय नई योजना का लाभ दिया जा रहा है। इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का आदेश दिया है।

राजेंद्र प्रसाद पटेल सहित अन्य की नियुक्ति वर्ष 1998 से शिक्षाकर्मी के पद पर हुई थी। तब से याचिकाकर्ता लगातार सेवाएं दे रहे हैं। 2018 में राज्य शासन ने इनका संविलियन शिक्षा विभाग में कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को इसी साल से पेंशन योजना का लाभ दिया गया। विभाग ने याचिकाकर्ताओं की सहमति के बिना ही नई पेंशन स्कीम के तहत उनके वेतन में से कटौती शुरू कर दी।

उनकी सेवा की गणना भी वर्ष 2018 से की गई है। इस पर उन्होंने अपने वकील संजीव वर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। इसमें बताया गया कि नई पेंशन योजना 2004 से लागू है। जबकि याचिकाकर्ता वर्ष 1998 से कार्यरत हैं।

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किसी भी नियुक्ति में सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति से की जाती है। लेकिन याचिकाकर्ताओं के लिए इस नियम को भी दरकिनार कर दिया गया है। प्रविधान के अनुसार याचिकाकर्ताओं को नई पेंशन योजना का लाभ दिया जाना गलत है। याचिका में 1976 की पुरानी पेंशन स्कीम ही लागू कराने की मांग की गई है। इस मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस पी सैम कोशी ने शिक्षा विभाग को आदेशित किया है कि याचिकाकर्ताओं को नियमानुसार पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ दिया जाए।

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