हाईकोर्ट ने टाईगर रिजर्व में चल रहे निर्माण पर लगाई रोक

रायपुर।

छत्तीसगढ़ के प्रमुख टाईगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में चल रहे निर्माण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे निर्माण से वन्यप्राणी और जंगल के नुकसान के साथ-साथ पैसों की भी बरबादी है।

मुख्य न्यायधीष्स अजय त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रितिंकर दिवाकर की युगलपीठ ने दिया निर्देष। कोर्ट की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी। बता दें कि अचानकमार क्षेत्र में करीब 7 करोड़ 45 लाख की लागत से 621 प्रधानमंत्री आवास योजना -ग्रामीण का कार्य किया जा रहा था। जिस पर रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने जनहित याचिका लगाई थी।

इसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब वर्ष 2020 तक कोर क्षेत्र के गावों का अचानकमार टाईगर रिजर्व से बाहर विस्थापन करना है तो नये मकान बनाने का कोई मतलब नहीं है।

बिलासपुर के पास स्थित अचानकमार टायगर रिजर्व में करीब 27 बाघों को रखा गया है। ऐसा वन विभाग का दावा है। इनके संरक्षण की दृष्टि से ही कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। प्रकरण के संबंध में याचिकाकर्ता सिंघवी ने बताया कि अचानकरमार छत्तीसगढ़ का वह प्रमुख टाईगर रिजर्व है जहां छत्तीसगढ़ के आधे बाघों के रहने का दावा वन विभाग करता है।

गत गणना अचानकमार में 27 बाघों का दावा किया गया था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वहां ऐसे 621 मकान, प्रति मकान 1 लाख 20 हजार रुपए की दर से बनाना चालू किया गया है जिनकी उम्र 30 वर्षों की रहेगी, जबकि इनहीं 19 गावों की विस्थापना वर्ष 2019-20 तक किया जाना प्रस्तावित है, जिसके तहत प्रत्येक परिवार को 10 लाख दिये जावेंगे।

वन विभाग ने बताया था कि 19 गावों के सभी ग्रामीण विस्थापन हेतु सहमत हैं तथा योजना भी तैयार है। कुल 25 गांवों में से 6 गांवों के 249 परिवारों का सफलतापूर्वक विस्थापन पहले ही हो चुका है तथा शेष 19 गांवों का विस्थापन तीन चरणों में किया जाएगा जिसके तहत 3394 परिवारों का विस्थापन वर्ष 2019-20 तक किया जाएगा।

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