हाईकोर्ट ने की सख्ती- अब री-इवैल्यूएशन पर CBSE छात्रों को राहत

न्यायमूर्ति मनमोहन व न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की खंडपीठ ने सीबीएसई की ओर से पेश इस तर्क को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता छात्रों को कहा कि वे इसके लिए संबंधित अथॉरिटी से संपर्क करें। खंडपीठ ने इसी के साथ इस मामले को लेकर दायर याचिका का निपटारा कर दिया। सीबीएसई ने आखिर हाईकोर्ट के कड़े रवैये को देख 12वीं कक्षा के छात्रों को राहत प्रदान कर दी। सीबीएसई ने कहा कि 12वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले यदि किसी भी छात्र को लगता है कि उसकी उत्तर पुस्तिका का ठीक से मूल्यांकन नहीं गया तो वह बोर्ड की वेरिफिकेशन स्कीम के तहत संपर्क कर सकता है। इस स्कीम के तहत छात्रों की शिकायतों का निपटारा किया जाएगा।

शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने खंडपीठ को बताया कि तय किया गया है कि यदि किसी भी छात्र को लगता है कि 12वीं में उसकी आंशरशीट का मार्किंग स्कीम के तहत सही तरह से मूल्यांकन नहीं किया गया तो वह सीबीएसई से संपर्क कर सकता है।

उन्होंने कहा सीबीएसई वेरिफिकेशन स्कीम के दायरे में छात्रों की शिकायतों को देखेगी। उन्होंने कहा सीबीएसई दोबारा मूल्यांकन से दूर जा चुकी है लेकिन वेरिफिकेशन पॉलिसी के तहत छात्रों के मामले को देखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि सीबीएसई की मार्किंग स्कीम जल्दी ही वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। इस मामले में कुछ छात्रों की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया था कि सीबीएसई ने दोबारा मूल्यांकन पॉलिसी को खत्म कर दिया है और उस फैसले को चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट ने हाल ही में सीबीएसई से पूछा है कि आप आंशरशीट को दोबारा मूल्यांकन से क्यों बचना चाहते हैं। आंशरशीट में सही आंशर पर भी जीरो नंबर दिए जाने वाली आंशरशीट दिखाए जाने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएसई से पूछा कि आप दोबारा मूल्यांकन से बचना क्यों चाहते हैं। अदालत ने सीबीएसई की ओर से पेश अधिवक्ता जैन से पूछा कि आंशरशीट में जो गड़बडिय़ां पाई गई है उस पर बोर्ड किस तरह से सफाई पेश करेगा।

इससे पहले सीबीएसई ने कहा था कि आंशरशीट की जांच में काफी कम गलतियां पाई गई थी और इस कारण दोबारा मूल्यांकन के प्रावधान को खत्म कर दिया गया था। अदालत इस दलील से सहमत नहीं हुई। अदालत ने कहा कि अगर एक भी छात्र पर भी इसका असर पड़ता है तो उसका कैरियर दाव पर होता है। एक-एक नंबर का अपना महत्व होता है, क्योंकि इस कारण छात्र अपने मनपसंद कोर्स व कॉलेज में दाखिले से वंचित हो जाता है।
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