IAS अनिल टुटेजा को हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत

अनिल टुटेजा के अग्रिम जमानत पर कोर्ट ने दी मंजूरी

मनमोहन पात्रे

बिलासपुर। बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति मामले मे आईएएस अनिल टुटेजा को आज बिलासपुर हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। विशेष न्यायालय से अपील खारिज हो जाने के बाद टुटेजा ने बिलासपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी।

फरवरी 2015 में एसीबी ने नान मुख्यालय समेत 28 ठिकानों पर छापा मारा था। इसमें तत्कालीन खाद्य सचिव डा. आलोक शुक्ला, तत्कालीन एमडी अनिल टुटेजा समेत 27 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ केस रजिस्टर्ड किया गया था। शुक्ला और टुटेजा चूकि ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी हैं, इसलिए उनके खिलाफ चालान पेश करने के लिए भारत सरकार से अनुमति मांगी गई थी।

जुलाई 2016 में भारत सरकार ने दोनों अफसरों के खिलाफ चालान पेश करने की इजाजत दे दी थी। लेकिन, पिछली भाजपा सरकार ने ढाई साल तक चालान पेश नहीं किया। विधानसभा चुनाव के जस्ट बाद मतगणना से पहले रमन सरकार ने नान घोटाले का चालान अदालत में पेश किया था।

हालांकि, भाजपा सरकार का विधानसभा में दिया बयान ही टुटेजा के लिए राहत का एक प्रमुख कारण बना। एसीबी ने जिस पीरियड में घोटाले और घटिया चावल सप्लाई के लिए केस दर्ज किया था, उसी पीरियड में चावल के गुणवता संबंधी एक सवाल के जवाब में सरकार ने लिखित जवाब में सदन को बताया कि उस समय उत्तम क्वालिटी की चावल सप्लाई की गई… कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई।

टुटेजा के वकीलों ने इसे भी अहम आधार बनाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल मात्र आठ महीने नान एमडी के पद पर रहे। इस दौरान टुटेंजा के खिलाफ व्यक्तिगत कोई शिकायत नहीं है। न ही उन्होंने किसी से रिश्वत मांगने काम्प्लेन हुआ, न ही प्रारंभिक एफआईआर में उनका नाम था। एसीबी ने 55 से अधिक गवाहों से पूछताछ के बाद भी कोई साक्ष्य नहीं जुटा पाई कि नान के आरोपियों से उनका कोई कनेक्शन था।

टुटेजा के आठ महीने तक प्रबंध निदेशक रहने के दौरान राज्य सरकार को कोई नुकसान भी नहीं हुआ। अलबत्ता, आडिट में नान को तीन करोड़ रुपए का लाभ ही हुआ। उनके वकील पीयूष भाटिया और आनंद मोहन सिंह ने कोर्ट को बताया कि टुटेजा के एमडी रहने के दौरान पीडीएस सिस्टम की जमकर तारीफ हुई बल्कि उसे कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा गया। इस दलील को सुनने के बाद जस्टिस आरपी शर्मा ने टुटेजा को अग्रिम जमानत दे दी।

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