उच्च शिक्षा मंत्री पाण्डेय ने नवाचार के प्रोटोटाइप निर्माण के लिए गोयल को भेंट किया सात लाख का चेक

मौके पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक भी उपस्थित थे

रायपुर : आज शाम राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में उच्च शिक्षा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने दुर्ग जिले के ओमप्रकाश गोयल को फण्ड कार्यक्रम के अंतरगत सात लाख रुपए का चेक प्रदान किया। यह राशि गोयल को उनके नवाचार के प्रोटोटाइप निर्माण के लिए प्रदान किया, पाण्डेय ने गोयल को प्रोटोटाइप निर्माण के लिए अपनी बधाई और शुभकामनाएं दी। इस मौके पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. के. सुब्रमण्यम भी उपस्थित थे।

दुर्ग जिले के ओमप्रकाश गोयल तथा भीष्म जोशी द्वारा नवाचार के अंतर्गत ‘ओप्टर टू इन वन’ बाईक का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। यह बाईक सड़क तथा जल दोनों पर चल सकती है। जिसका उपयोग प्रदेश के जलाशयों आदि में जलकुम्भी तथा अन्य कचरा आदि सामग्री को साफ करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा बाढ़ राहत के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है। इसके प्रोटोटाइप निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके तहत उन्हें आज प्रोटोटाइप निर्माण के लिए विमुक्त की जाने वाली राशि की पहली किश्त के रूप में सात लाख रूपए की राशि प्रदान की गई।

इस कार्य को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ फार्म मशीनरी एण्ड पावर इंजीनियरिंग, फैकल्टी ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग के प्राध्यापक डॉ. अजय वर्मा के मार्गदर्शन में सम्पन्न किया जाएगा। इस प्रोटोटाइप निर्माण की कुल लागत राशि दस लाख रूपए है। इसके निर्माण को छह माह में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इस नवाचार को सहायता देने तथा अन्य वैज्ञानिक मार्गदर्शन देने के लिए छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा एक विशेषज्ञ समिति भी बनाई गई है।

इसमें राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के प्राध्यापक डॉ. एस.पी.एस. मथारू और इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायपुर के प्राध्यापक डॉ. टी. रामाराव को नामांकित किया गया है। वर्तमान संदर्भ में नवाचार और अभिनव सोच तथा कार्यकलाप की अत्यधिक आवश्यकता है। इन्हीं विचारों को मूर्त रूप देने के लिए छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा बौद्धिक सम्पदा अधिकार केन्द्र की स्थापना की गई है। इसके अंतर्गत पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर, ग्रासरूट इनोवेशन ऑगमेनटेशन नेटवर्क तथा इनोवेशन फण्ड कार्यक्रम आदि संचालित किए जाते हैं।

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