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हिमाचल प्रदेश चुनाव: महिलाओं की भागीदारी राजनीति में बढ़ रही है

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी क्षेत्र में जहां अधिकतर महिलाएं खेती के कार्य और चूल्हे- चौके में अधिकतर व्यस्त रहती हैं वहां पिछले एक दशक में चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत बढ़ी है. प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा सक्रिय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास यद्दपि पूरी तरह सफल नही हुए हैं फिर भी जो प्रयास प्रमुख राष्ट्रीय राजनैतिक दलों ने किए हैं उनसे राजनीति में महिला सशक्तिकरण के संकल्प को गति मिली है.

हिमाचल प्रदेश की कुल जनसंख्या में 49.28 प्रतिशत महिलाएं हैं. वैसे चुनावों में महिलाओं की भागीदारी का चार दशक पुराना राजनीतिक इतिहास यदि खंगाला जाए तो सबसे पहले 1972 का विधान सभा चुनाव नजर आता है जहां सरला शर्मा, चन्द्रेश कुमारी, लता ठाकुर और पद्मा चुनाव जीत कर विधान सभा में पहुंची थीं. इसी दौरान 1974 में श्रीमती विद्या स्टोक्स भी पहली बार हिमाचल विधान सभा का उपचुनाव जीत कर प्रदेश की विधानसभा में आई थीं.

1977 से बढ़ी है महिलाओं की भागीदारी
वर्ष 1977 में 9 महिलाएं चुनाव में खड़ी हुईं थीं और उसमे केवल जिला सिरमौर के नाहन से श्यामा शर्मा विजयी हुईं थी और शांता कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री बनी थीं. वर्ष 1998 में पहली बार 7 महिलाओं ने विधानसभा चुनावों में भाग लिया था और इन सातों महिलाओं ने चुनाव जीता था. इनमें श्रीमती विद्या स्टोक्स, विप्लवठाकुर, आशाकुमारी और कृष्णा मोहिनी कांग्रेस पार्टी से थीं और उर्मिल ठाकुर, सरवीन चौधरी और बिमला कुमारी भारतीय जनता पार्टी से थीं.

इस चुनाव में प्रदेश में 36.28 लाख वोटर थे जिनमें से 18.01 लाख महिला वोटर थीं. कुल मतदान 71.23 प्रतिशत हुआ था जिसमें से महिलाओं की मतदान प्रतिशतता 72.73 प्रतिशत थी. वर्ष 2003 में विधान सभा चुनावों में महिलाओं प्रत्याशियों की संख्या में इजाफा हुआ था. यह प्रतिशत 2.78 % से बढ़ कर वर्ष 2007 में 4.88 % हो गयी थी.
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में कुल 34 महिलाएं चुनावी अखाड़े में उतरी थीं जिनमे से तीन महिला प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाई थीं. इनमे से आशाकुमारी और विद्या स्टोक्स कांग्रेस से थीं और सरवीन चौधरी भारतीय जनता पार्टी से थीं. विद्या स्टोक्स, आशा कुमारी और सरवीन चौधरी पुनः तेरहवीं विधान सभा के लिए भी इस बार किस्मत आजमा रही हैं.

इस बार के चुनावों में ये महिलाएं हैं मैदान में
इस बार के चुनावों में अधिकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दलों कांग्रेस और बीजेपी ने मिल कर 8 महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया है. जिनमें से पांच भारतीय जनता पार्टी की हैं और 3 कांग्रेस से हैं.
भारतीय जनता पार्टी की 5 महिला प्रत्याशियों में से 4 पहली बार चुनाव लड़ रही हैं. शाहपुर से सरवीण चौधरी, इंदौरा से रीता धीमान, पालमपुर से इंदु गोस्वामी,रोहड़ू से शशि बाला और भोरंज से कमलेश कुमारी कुसुम्पटी से विजय ज्योति सेन हैं.

इन पांचों सीटों में से शाहपुर को छोड़ कर सभी विधानसभा क्षेत्रों में महिला प्रत्याशी पहली बार चुनावी-दंगल में उतरी हैं. कांग्रेस ने डलहौजी से आशा कुमारी और देहरा से विप्लव ठाकुर को प्रत्याशी बनाया गया है. काफी उठापटक के बाद ठियोग से एक बार फिर विद्या स्टोक्स ने कांग्रेस से पर्चा भरा है. हालांकि अंतिम स्थिति अभी साफ नहीं है.
कुसुम्पटी, भोरंज और पालमपुर में तो इन महिला प्रत्याशियों के कारण चुनावी-दंगल आने वाले दिनों में और अधिक रोचक होने वाला है. हो सकता है कुछ चुनावी हल्कों में यह महिला प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंद्वियों को करारी टक्कर दे कर चुनाव में विजय-श्री प्राप्त करें .

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