हिमाचल प्रदेश

हिमांचल बस हादसा, मासूम के शवो के इन्तजार में बिलखते रहें परिजन

हादसे में मारे गए बच्चों के परिवारों को उनका शव लेने के लिए करीब 3 घंटे अस्पताल के बाहर खड़े रहकर इंतजार करना पड़ा

हिमांचल प्रदेश

सोमवार को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्कूल बस खाई में गिर गई. इस दर्दनाक हादसे में 26 बच्चों समेत 29 लोगों की मौत हो गई. 10 बच्चे घायल हैं जिनका इलाज किया जा रहा है. हादसे में स्कूल बस में सवार 2 टीचर और 1 ड्राइवर की भी मौत हो गई. बस में 40 बच्चे सवार थे.वही कांगड़ा में हुए बस हादसे के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई है. हादसे में मारे गए बच्चों के परिवारों को उनका शव लेने के लिए करीब 3 घंटे अस्पताल के बाहर खड़े रहकर इंतजार करना पड़ा. जानकारी के मुताबिक, अस्पताल ने परिवारों से कहा कि मुख्यमंत्री के आने के बाद ही बच्चों के शव सौंपे जाएंगे. आखिरकार, मंत्री जी तय समय से करीब ढाई घंटे देर से अस्पताल पहुंचे जिसके बाद ही परिजनों को बच्चों के शव दिए गए.

मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हालात का जायजा लेने मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे नूरपुर के अस्पताल पहुंचने वाले थे. लेकिन, मौसम खराब होने के कारण वह तय समय से ढाई घंटे देर से करीब 11 अस्पताल पहुंचे. इस बीच परिवार अपने बच्चों के शव के इंतजार में अस्पताल के बाहर खड़े बिलखते रहे. इसे सरकार और अस्पताल प्रशासन की असंवेदनशीलता ही कहेंगे कि जिन परिवारों ने अपने जिगर के टुकड़े खोए हों उन्हें अस्पताल और प्रशासन से भी ऐसी उपेक्षा मिली. आखिरकार 3 घंटों के इंतराज के बाद परिवार को मासूमों के शव सोंपे गए. जानकारी यह भी है कि, पठानकोट के अस्पताल में जिन बच्चों की मौत हुई थी उनके शव पहले नूरपुर के अस्पताल लाए गए फिर परिजनों को सौंपे गए.

पहली बार स्कूल गया था ‘ठाकुर’

हादसे में काल का ग्रास बना साढ़े तीन साल का परनीश पहली बार स्कूल गया था. वह काफी खुश था. परनीश के परिजनों ने बताया कि वह उसे प्यार से ठाकुर बुलाते थे. पिता रघुनाथ सिंह बताते हैं कि उसे बीते गुरुवार ही स्कूल भेजना शुरू किया था. रविवार को उसके दादा नया बैग लेकर आए थे, जिसे वह अपने दोस्तों को दिखाना चाहता था. सोमवार को सुबह वह अपने आप ही बैग उठाकर मां और बहन के साथ स्कूल गया था. अब पूरे परिवार में सन्नाटा है. हादसे ने पूरे परिवार को गहरा सदमा दिया है.

कभी पूरा न होने वाला इंतजार दे गया हादसा

नूरपुर उपमंडल की ठेहड़ पंचायत में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा है. बस सुनाई दे रही हैं तो घरों से आती चीखों की आवाजें. रविवार तक चक्की दरिया के ठीक ऊपर पहाड़ी में बसे इस गांव के लोगों का जीवन सामान्य था. लेकिन सोमवार को हुए बस हादसे ने जैसे सभी को सदमे में धकेल दिया. हादसे में सबसे अधिक तबाही अगर किसी गांव की हुई है तो वह है खुआड़ा. इस गांव के 14 मासूमों को यह हादसा लील गया है. मंगलवार को खुआड़ा गांव के 12 बच्चों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया. हादसे में ठेहड़ पंचायत के 20 लोगों की मौत हुई है. जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, खुआड़ा गांव वहां से बमुश्किल सौ मीटर की दूरी पर है. चंद कदम पहले ही मौत ने इन बच्चों को अपना शिकार बना लिया.

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