राष्ट्रीय

न डॉक्टर, न उपकरण फिर भी मरीज़ ख़ुश

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी ज़िला का सरकारी अस्पताल में  बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर अस्पतालों का बाज़ार सा लगा है और वहां ठेके पर इलाज हो रहा है. एक ऐसे सरकारी अस्पताल की कहानी जहां न पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही उपकरण लेकिन फिर भी लोग वहां इलाज कराकर ख़ुश हैं.

इस अस्पताल में न एक्सरे की सुविधा है और न ही कोई विशेषज्ञ डॉक्टर. बिना चारदीवारी के इस सरकारी अस्पताल से फिर भी मरीज़ ख़ुश होकर घर जाते हैं.

तो फिर मैनपुरी ज़िला मुख्यालय से करीब चालीस किलोमीटर दूर किशनी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऐसा क्या है कि तमाम असुविधाओं और कमियों के बावजूद यहां रोज़ाना ढाई सौ से अधिक मरीज़ आते हैं?

यहां आए लोगों से बात करके पता चलता है कि अस्पताल के अधीक्षक शम्भू सिंह डॉक्टरों और उपकरणों की कमी के बावजूद मरीज़ों का तसल्ली-बख़्श इलाज करते हैं.

साइकिल चलाकर क़रीब 12 किलोमीटर दूर से आए एक मरीज़ ने बताया कि उसके गांव के पास भी एक सरकारी अस्पताल है, लेकिन वो वहां से दवाई नहीं लेते क्योंकि वहां तैनात सरकारी डॉक्टर उससे सौ रुपए फ़ीस मांगते हैं.

एक महिला मरीज़ ने रुआंसी आवाज़ में बताया, “छोटे डॉक्टर ने कह दिया था कि अस्पताल बंद है कल आना, लेकिन बड़े डॉक्टर साहब ने दवा दी और इंजेक्शन लगाया. वो डॉक्टर साहब बहुत अच्छे हैं.”

ये महिला, अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर शम्भू सिंह की बात कर रही थी जो चार साल से इस अस्पताल में तैनात हैं. वो यहां के एकमात्र एमबीबीएस डॉक्टर हैं.

 

Summary
Review Date
Reviewed Item
उपकरण
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags
jindal

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.