अमेरिका में कारावास के समय भगवद्गीता ही रहा उनका सहारा : रजत गुप्ता

प्रतिभूति बाजार में भेदिया कारोबार का आरोप

नई दिल्ली: प्रतिभूति बाजार में भेदिया कारोबार के मामले में अमेरिका में 19 महीने सजा काटने के बाद गोल्डमैन सॉक्श के भारतीय मूल के पूर्व निदेशक रजत गुप्ता ने अपनी पुस्तक ‘माइंड विदाउट फियर’ पर आयोजित परिचर्चा के दौरान कहा, ‘(जेल में) मेरे पास भागवद् गीता थी…हालांकि मैं भगवद् गीता से परिचित था, लेकिन मुझे जेल में उसे कई बार उसे पढ़ने का मौका मिला और एकांत कारावास के आठ सप्ताह के दौर में गीता के कुछ विचारों ने मुझे समय काटने में बड़ा सहारा दिया.’

उन्होने कहा कि अमेरिका में कारावास के समय भगवद् गीता ही उनका सहारा रहा. गुप्ता को 2012 में हेजफंड के संस्थापक राज राजारत्नम को गोल्डमैन सॉक्श के निदेशक मंडल की बैठक के बाद फोन पर बाजार की दृष्टि से संवेदनशील अघोषित सूचना देने का दोषी पाया गया था.

इसके बाद उसे दो साल के जेल की सजा सुनायी गयी थी. उन्हें 2016 में जेल से रिहा किया गया था. भारत में जन्में और आईआईटी के पूर्व छात्र गुप्ता ने कहा कि भारत सबसे ज्यादा प्रतिभा का निर्यात करता है. उन्होंने कहा, ‘हम सूचना-प्रौद्योगिकी सेवाओं में शानदार हैं लेकिन हम गूगल और फेसबुक जैसे वास्तव में बड़े ब्रांड नहीं विकसित कर सके हैं.’

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