14 वी 15 सदी में नागवंशी राजाओ के शासन काल में बना ऐतिहासिक ओम्कारेश्वर शिव मन्दिर

ऐतिहासिक ओम्कारेश्वर शिव मन्दिर को शासन द्वारा राजकीय धरोहर होने का दर्जा भी प्राप्त है।

बालोद : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरुर तहसील अंतर्गत ग्राम पालारी में 14 वी 15 सदी में नागवंशी राजाओ के शासन काल में बना ऐतिहासिक ओम्कारेश्वर शिव मन्दिर है।

जिसे शासन द्वारा राजकीय धरोहर होने का दर्जा भी प्राप्त है। यह मन्दिर 16 स्तभों पर टीका हुवा है  व अंदर गर्भ गृह में शिव लिंग की प्रतिमा विस्थापित है ।मन्दिर के पत्थरो पर हिन्दू देवी देवताओ की चित्रकारी उकेरी गयी है ।

साथ ही दुर्लभ पुष्पक विमान का चित्र भी यंहा के पत्थर पर उकेरा गया है। लोगो का मत है, की वनवास काल के समय पांचो पांडव कुंती द्रोपदी सहित पालारी के शिव मन्दिर में लारी यानि झोपड़ी छाकर रुके थे। इसलिए इस गांव का नाम पालारी पड़ा है।

वंही पालारी  से लगे समीपस्थ ग्राम कँवर है जिसका प्राचीन नाम कौरवगड़ था। बताते है की कौरव बन्धु पांडवों को ढूंढते हुवे कँवर पहुंचे थे। इसलिए यंहा का  प्राचीन नाम कौरवगड़ पड़ा। 

बता दे कि शिव मन्दिर पालारी में सावन के महीने में प्रत्येक सोमवर को कांवरिये जल चढ़ाने आते है। तथा दूर दूर से दर्शनार्थी यंहा भगवान शिव जी का दर्शन करने आते है।

महाशिवरात्रि पर्व पर दो दिनों तक मन्दिर परिसर में मेला का आयोजन किया जाता है।साथ हो मनोकामना पूर्ति के लिए श्रद्धालुगन महामृत्युंजय ज्योति कलश भी प्रज्वलित करवाते है।

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