22 मार्च से 28 मार्च तक रहेगा होलाष्टक, नहीं करना चाहिए कोई भी शुभ कार्य

इन दिनों किसी भी मांगलिक कार्य का आरंभ शुभ नहीं माना जाता तथा 16 संस्कार भी नहीं किए जाते

रायपुर: फाल्गुन के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलिका दहन तक की अवधि को शास्त्रों में होलाष्टक कहा गया है। इन दिनों किसी भी मांगलिक कार्य का आरंभ शुभ नहीं माना जाता तथा 16 संस्कार भी नहीं किए जाते।

ज्योतिष के अनुसार, अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु उग्र स्वभाव के हो जाते हैं। इन ग्रहों के निर्बल होने से मानव मस्तिष्क की निर्णय क्षमता क्षीण हो जाती है और इस दौरान गलत फैसले लेने के कारण हानि की संभावना रहती है।

आज से होलाष्टक भी शुरू हो गया है. फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है. होली के आठ दिन पहले इसकी शुरुआत हो जाती है. इस बार होलाष्टक 22 मार्च से 28 मार्च तक रहेगा.

शास्त्रों में महत्व

शास्त्रों में इसका बहुत महत्व है. इस अवधि भक्ति की शक्ति का प्रभाव बताती है. इस अवधि में तप करना ही अच्छा रहता है. होलाष्टक शुरू होने पर एक पेड़ की शाखा काट कर उसे जमीन पर लगाते हैं. मान्यताओं के अनुसार, उस क्षेत्र में होलिका दहन तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है.

मांगलिक कार्य करने की मनाही

शास्त्रों के अनुसार, होलाष्टक शुरू होने के साथ ही 16 संस्कार पर रोक लग जाती है. जैसे नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार जैसे शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है. होलाष्टक के 8 दिन किसी भी मांगलिक शुभ कार्य को करने के लिए शुभ नहीं होता है. शादी-विवाह, भूमि पूजन व गृह प्रवेश करना चाहिए.

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