ज्योतिष

हिंदुओं के पवित्र त्योहार: नवरात्रि उत्सव

साल में दो बार चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के रूप में मां दुर्गा के नौ रूपों की अराधना

नवरात्रि हिंदुओं के पवित्र त्योहारों में से एक है। इन 9 दिनों में नौ-दुर्गाओं की पूजा अर्चना की जाती है। साल में दो बार चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के रूप में मां दुर्गा के नौ रूपों की अराधना की जाती है। इस दौरान घर-घर में भजन-कीर्तन आदि का आयोजन होता है। दसवाँ दिन दशहरे के नाम से भी प्रसिद्ध हैं।

नवरात्रि के नौ रातो में शक्ति के तीनों देवियों – देवी सरस्वती (विद्या की देवी), देवी लक्ष्मी (धन की देवी), और देवी दुर्गा (शक्ति की देवी) के नौ रूपों की पूजा की जाती हैं। शारदीय नवरात्रि को पूर्वी भारत में दुर्गापूजा और पश्चिमी भारत में डांडिया के रूप में भी मनाया जाता है।

नवरात्री क्यों मनाते हैं?

पौराणिक कथाओं के अनुसार नवरात्रि मनाने का कारण भगवान राम के द्वारा रावण का वध करना और मां दुर्गा के द्वारा महिषासुर का वध करना माना जाता है। इस विषय में कुछ कथाएं प्रसिद्ध है जो इस प्रकार है-

नवरात्री प्रथम कथा

राम और रावण के बीच जब युद्ध होने वाला था उससे पहले ब्रह्माजी ने देवो के माध्यम से श्रीराम से रावण वध के लिए देवी चंडी की एक सौ आठ “नीलकमल” के द्वारा पूजा करके प्रसन्न करने को कहा।

परामर्श के अनुसार श्रीराम ने पूजा के लिए हवन सामग्री और 108 नीलकमल की व्यवस्था की परन्तु रावण ने अपनी मायवी शक्ति से हवन सामग्री और 108 नीलकमल गायब कर दिया और श्री राम को जब अपना संकल्प टूटते नजर आने लगा तो उसी समय उन्हें स्मरण आया कि लोग मुझे “कमलनयन-नवकंच-लोचन” भी कहते हैं। उसके बाद श्री राम ने अपने संकल्प को पूर्ण करने के लिए नेत्र अर्पित करने का निर्णय लिया और जैसे तीर को आँख के पास ले गये वैसे ही देवी चंडी प्रसन्न हो कर प्रकट हुई और विजयी होने का आशीर्वाद दे दी।

दूसरी तरफ रावण भी चंडी देवी की पूजा आयोजन किया था और ब्राह्मणों को बुलाया था। हनुमान जी भी बालक ब्राह्मण का रूप रखकर अन्य ब्राह्मणों की खूब सेवा किया और ब्राह्मण ख़ुश होकर उन्हें वरदान मागने को कहा तब हनुमान जी ने पूजा में होने वाले मन्त्र में एक अक्षर बदलने का वरदान मांग लिया जिससे पूजा कार्य अच्छे से सम्पन्न नही हो पाया और रावण को विजयश्री का आशीर्वाद नही मिला। इससे शक्ति देवी रुष्ट हो गई और रावण का सर्वनाश करवा दिया। इस दिन को असत्य पर सत्य की विजय का भी त्यौहार मानते हैं और शक्ति की देवी की पूजा भी की जाती हैं।

नवरात्री द्वितीय कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर ने भगवान् शिव की घोर तपस्या करके और उनसे वरदान माँगकर बड़ा ही ताकतवर हो गया और उसके बाद वह स्वर्ग पर आक्रमण करके वहा का स्वामी बन बैठा और देवराज इंद्र सहित सारे देवताओं को वहाँ से निकाल दिया। महिषासुर देवता, मनुष्य और अन्य जीवो पर अत्याचार करने लगा और वह इतना ताकतवार था कि उसका सामना करना संभव नही था।

सभी देवता इससे दुखी होकर, भगवान् विष्णु जी से इसका उपाय पूछा तब विष्णु जी के सुझाव से सभी देवता अपनी शक्ति और अस्त्र को देवी दुर्गा को दिया जिससे वो दुष्ट महिषासुर का वध कर सके। इससे देवी दुर्गा बहुत शक्तिशाली हो गयी और नौ दिन तक देवी-महिषासुर संग्राम हुआ और अंत में महिषासुर का वध करे दिया इसलिए शक्ति रूप माँ दुर्गा को पूजा और अर्चना बड़े धूम-धाम से की जाती हैं।

शक्ति की नौ देवियों के नाम इस प्रकार हैं-

शैलपुत्री – पहाड़ों की पुत्री

ब्रह्मचारिणी – ब्रह्मचारीणी।

चंद्रघंटा – चाँद की तरह चमकने वाली

कूष्माण्डा – पूरा जगत उनके पैर में है

स्कंदमाता – कार्तिक स्वामी की माता

कात्यायनी – कात्यायन आश्रम में जन्मि

कालरात्रि – काल का नाश करने वाली

महागौरी – गौरे रंग वाली मां

सिद्धिदात्री – सर्व सिद्धि देने वाली

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715, 9811598848

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