पुलिस को स्मार्ट बनाने गृह मंत्रालय ने तैयार किया 5 सालों का एक खाका

गृह मंत्रालय द्वारा मांगे गए प्रपोजल पर कई राज्यों ने अपने बेहतर सुझाव दिए

नई दिल्ली: देश की पुलिस व्यवस्था और अर्धसैनिक बलों में नई तकनीकि का इस्तेमाल कर पुलिस को स्मार्ट बनाने केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 5 सालों का एक खाका तैयार किया है, जिसमें सभी अर्धसैनिक बलों और राज्यों के पुलिस से शुरुआती प्रपोजल लिए जा रहे हैं, जिसका मकसद यह है कि देश में स्मार्ट पुलिस का एक ऐसा सिस्टम तैयार हो, जिसका इस्तेमाल हर स्थिति से निपटने के लिए किया जा सके.

गृह मंत्रालय द्वारा मांगे गए प्रपोजल पर कई राज्यों ने अपने बेहतर सुझाव दिए हैं. पुलिस को मॉडर्न बनाने के लिए जितनी रकम खर्च होगी, उसमें केंद्र और राज्य का क्या हिस्सा होगा, इस पर भी गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय कमेटी फैसला लेगी.

सूत्रों ने बताया है कि पुलिस फोर्स के अंदर एक स्पेशलाइज्ड यूनिट तैयार की जाएगी, जोकि बेहद मॉडर्न हथियारों, कम्युनिकेशन सिस्टम और सर्विलांस गैजेट से लैस होगी. वहीं बेहतर जांच के लिए पुलिस के जांच अधिकारियों को मॉडर्न इन्वेस्टिगेशन के टूल्स और तकनीक को सिखाया जाएगा. आने वाले दिनों में गृह मंत्रालय की एक हाई पावर कमेटी इस मामले के जुड़े सुझाव पर कैसे अमल लाया जाए, उसको अंतिम रूप देगी.

बता दें कि पीएम मोदी ने 2014 में गुवाहटी में डीजीपी, आईजीपी की कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था. उस दौरान पीएम मोदी ने कहा था वह एक ऐसा बल चाहते हैं, जो कारगर तरीके से देश की कानून व्यवस्था की देख रेख कर सके.

प्रधानमंत्री मोदी ने स्मार्ट पुलिसिंग की अवधारणा की वकालत करते हुए कहा था कि कारगर खुफिया नेटवर्क वाले देश को सरकार चलाने के लिए किसी हथियार और गोला बारूद की जरूरत नहीं है.

पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि स्मार्ट पुलिसिंग से मेरा मानना यह है कि ‘स्मार्ट (S-M-A-R-T) पुलिसिंग कहें तो ‘एस’ से मेरा तात्पर्य स्ट्रिक्ट कठोर लेकिन संवेदनशील, ‘एम’ से तात्पर्य मार्डन यानी आधुनिक और सचल, ‘ए’ से तात्पर्य अलर्ट यानी सतर्क और जवाबदेह, ‘आर’ से तात्पर्य रिलायबल यानी विश्वसनीय और प्रतिक्रियावादी साथ ही ‘टी’ से तात्पर्य टैक्नो सेवी यानी प्रौद्योगिकी का जानकार और दक्ष है.’

इसके अलावा, प्रत्येक राज्य में एक पुलिस एकेडमी हो जहां नए रंगरूटों को प्रशिक्षण दिया जाए और उनके पाठ्यक्रम में, दायित्व निर्वाह के दौरान मारे गए पुलिसकर्मियों का जीवन वृतांत शामिल किया जाना अनिवार्य होना चाहिए.’

प्रधानमंत्री ने इस कांफ्रेंस में कहा था कि ‘एक नई आधिकारिक सरकारी पुस्तक होनी चाहिए, जिसमें नई पीढ़ी के पुलिसकर्मी इन शहीदों के जीवन और बलिदान के बारे में पढ़ सकें और हर साल इसका नया अपडेटेड एडिशन लाया जाना चाहिए.

वहीं वर्ष 2019 में गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी में दिए अपने भाषण में कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी ने जो भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का विजन बनाया है, यह तभी हासिल हो सकता है जब देश की कानून व्यवस्था सुदृढ़ हो और हर तरफ शांति रहे. यह तब हो सकता है जब देश की पुलिस व्यवस्था स्मार्ट हो और यही वजह है कि गृह मंत्रालय स्मार्ट पुलिसिंग का 5 ईयर प्लान तैयार कर उस को अमलीजामा पहनाने की ओर काम कर रहा है.

कैसे होंगे स्मार्ट Cop

1. पुलिस और अर्धसैनिक बलों के यूनिफॉर्म प्रोटेक्शन गियर में अलग तरीके के बदलाव किए जाएंगे. हर जवान के पास उसकी यूनिफार्म में वार्निंग सेंसर लगे होंगे, जिसमें हेल्थ पैरामीटर को जानने और लैंडमाइन डिटेक्शन सेंसर होंगे.

2. हर स्मार्ट कॉप से जुड़े जवान ग्रुप रेडियो से जुड़े होंगे, जिससे इन जवानों की वर्तमान स्थिति और बेहतर कम्युनिकेशन होता रहे.

3. हर स्मार्ट कॉप को 5th जेनेरेशन की बुलेट प्रूफ जैकेट मुहैया कराई जाएगी, जिसकी खासियत ये होगी कि गर्दन और कंधे की प्रोटेक्शन के साथ साथ वजन में काफी हल्के होंगे.

4. इन जवानों के हेलमेट पहले के मुकाबले आधुनिक और हल्के होंगे, इसके साथ ही हेलमेट पर नाईट विजन लगे होंगे, जिससे रात में भी ऑपरेशन किया जा सके.

5.स्मार्ट कॉप के शूज पहले के मुकाबले हल्के और कंफर्टेबल होंगे, जिससे जवान इनको लंबे वक्त तक पहन सकें.

6. कम्युनिकेशन सिस्टम बेहतर किया जाएगा, जिससे वो कमांड सेंटर से संपर्क में रह सकें.

7.एसॉल्ट राइफल यानी हथियारों में बदलाव लाया जाएगा और मॉडर्न एसॉल्ट राइफल दी जाएंगी.

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