छत्तीसगढ़

महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा किया गया शिक्षकों का सम्मान

प्राचार्य डाॅ. राजेश श्रीवास्तव ने सम्मानित किए जाने हेतु सभी शिक्षकों की ओर से प्रबंधन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा

रायपुर : शिक्षक दिवस के अवसर पर श्री साई बाबा आदर्श महाविद्यालय में महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कोविड 19 की परिस्थिति में जारी दिशा निर्देशों के अनुरूप सामाजिक शारीरिक दूरी का पालन करते हुए आयोजित कार्यक्रम में समस्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में शासी निकाय के अध्यक्ष विजय कुमार इंगोले, शिक्षण समिति के सचिव अजय कुमार इंगोले, प्राचार्य डाॅ. राजेश श्रीवास्तव, सर्वविभागाध्यक्ष, वरिष्ठ प्राध्यापकों तथा छात्र प्रतिनिधियों द्वारा माँ सरस्वती एवं श्री साई नाथ की पूजा अर्चना तथा सर्वपल्ली राधाकृष्णन के छायाचित्र पर माल्यार्पण करने के पश्चात् शिक्षण समिति के सचिव अजय कुमार इंगोले ने वर्तमान परिदृश्य में शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि सर्वपल्ली डाॅ. राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर हम न सिर्फ इस महाविद्यालय के शिक्षकों का सम्मान कर रहे है अपितु इस माध्यम से दुनिया के समस्त शिक्षकों तक अपनी कृतज्ञ भावनाएं संप्रेषित कर रहे है।

महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष विजय कुमार इंगोले ने कहा कि शिक्षक संपूर्ण विश्व का अप्रतिम व्यक्तित्व होता है जो सदैव देने का कार्य करता है। उसका यह दान विद्या के रूप में होता जो विद्यार्थी का परिष्कार करते हुए समाज का कल्याण तथा राष्ट्र के निर्माण में सहभागी होता है। उन्होने विश्वास जताया कि इस महाविद्यालय के शिक्षकों द्वारा शिक्षा के प्रसार जैसे पुनीत कार्य में दी गई आहुति से हम महाविद्यालय को ज्ञान के मंदिर के रूप में स्थापित कर पाने में सफल होगें।

प्राचार्य डाॅ. राजेश श्रीवास्तव ने सम्मानित किए जाने हेतु सभी शिक्षकों की ओर से प्रबंधन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा

प्राचार्य डाॅ. राजेश श्रीवास्तव ने सम्मानित किए जाने हेतु सभी शिक्षकों की ओर से प्रबंधन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शिक्षक ही एक मात्र ऐसा व्यक्ति होता है जिसमें दुनियां बदलने की शक्ति होती है। विद्यार्थियों को शिक्षा एवं संस्कार दे कर चुनौतियों का सामना करने की क्षमता पैदा करने के अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन करना शिक्षकीय कार्य के महत्व को द्विगुणित कर देता है। उन्होने नई शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में शिक्षकों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

कला एवं सामाजिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष डाॅ. रविन्द्रनाथ शर्मा ने प्राचीन भारत की शिक्षा व्यवस्था की चर्चा करते हुए शिक्षक के गुणों को उद्धृत किया। वाणिज्य एवं प्रबंधन के विभागाध्यक्ष डाॅ. सुमित कुमार डे ने शिक्षक के रूप में अपना शत् प्रतिशत योगदान देने की बात कही। कम्प्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. रितेश वर्मा ने बदलते परिवेश में शिक्षक की चुनौतियों तथा उसके अनुरूप तैयारी की बात कही। जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष अरविन्द तिवारी ने डाॅ. राधाकृष्णन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।

भौतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष शैलेष देवांगन ने कहा कि प्रत्येक शिक्षक पहले विद्यार्थी होता है तथा प्रत्येक व्यक्ति अथवा वस्तु से शिक्षा ली जा सकती है। क्रीड़ाधिकारी ब्रम्हेश श्रीवास्तव ने भारत की गौरवशाली गुरू एवं गुरूकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक की स्थिति का तुलनात्मक स्वरूप प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन छात्रा दामिनी राजोरिया एवं साक्षी अग्रवाल ने किया। आयोजन में सभी कार्यालयीन कर्मचारियों एवं छात्र प्रिंस कुमार सिंह, साकेत केडिया, सुमन मिंज, अभिजीत झा, साहित कुशवाहा , राहुल सिंह, साक्षी केडिया, राधिका, मुस्कान अग्रवाल तथा इंदरपाल सिंह छाबड़ा की सक्रिय भूमिका रहीं।

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