राष्ट्रीय

सरकार पेट्रोल की कीमतों पर लगाएगी लगाम पर बड़ा सवाल कैसे?

केन्द्रीय मंत्री ने दलील दी है कि तेल की बढ़ी कीमतों से जो पैसा सरकार के पास आ रहा है वह सड़क बनाने और अन्य जनहित योजनाओं में खर्च किया जाता है.

नई दिल्ली: तेल की लगातार बढ़ती कीमतों से सभी परेशान हैं. सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का हवाला दे रही है. बात तो सही है मगर यह समस्या का हल नहीं है. हो सकता है कि ईरान संकट के चलते आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं. सरकार को इस पर लगाम लगानी ही होगी, मगर सबसे बड़ा सवाल है कैसे?

दिक्कत ये है कि जब कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम थी तब भी भारत सरकार ने तेल की कीमत कम नहीं की और अपना खजाना भरती रही. अब सरकार के एक केन्द्रीय मंत्री ने दलील दी है कि तेल की बढ़ी कीमतों से जो पैसा सरकार के पास आ रहा है वह सड़क बनाने और अन्य जनहित योजनाओं में खर्च किया जाता है.

सरकार ने नवंबर 2014 से लेकर फरवरी 2016 तक 9 बार तेल की एक्साईज ड्यूटी बढ़ाई हालांकि उस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं. इस दौरान सरकार ने समय-समय पर 12 रु 2 पैसे पेट्रोल की कीमतें बढ़ाई जबकि इसी दौरान सरकार ने डीजल की कीमतों में 13 रु 7 पैसे का इजाफा किया.

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