कांग्रेस ने कसा PM मोदी पर तंज, केंद्र सरकार पर नहीं गिनाने को उपलब्धियां

नई दिल्लीः कांग्रेस ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पास शासन की उपलब्धियों के नाम पर गिनाने को कुछ भी नहीं है, यही वजह है कि चुनावी फायदे के लिए फिर से ‘धार्मिक ध्रुवीकरण’ का कॉकटेल बनाने का प्रयास शुरू किया जा चुका है।

पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एक महीने के भीतर प्रधानमंत्री की उत्तर प्रदेश की सात यात्राएं इस बात का संकेतक है कि भारतीय जनता पार्टी घबराई और तिलमिलाई हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिस तरह का शासन-प्रशासन आदित्य योगी सरकार ने दिया है, उससे राज्य के लोगों के बीच निराशा व्याप्त है। प्रधानमंत्री के इन दौरों से यह साफ झलकती है।

धार्मिक धुव्रीकरण का कॉकटेल बनाया जा रहा
तिवारी ने कहा कि जाहिर है, लोकसभा चुनाव से छह से नौ महीने पहले प्रधानमंत्री का यह दौरा विकास के लिए तो नहीं ही है। ऐसा जमावड़ा गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले देखा जा चुका है। उन्होंने कहा कि देश में विकास के परखच्चे उड़ चुके हैं, अगर कोई कॉकटेल बनाया जा रहा है तो सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण का।

प्रवक्ता ने कहा, देश में पिछले 12 महीने से लिंचिंग का एक प्रकरण चला है और उसके राजनीतिकरण की कोशिश की गयी है, उसका सीधा-सीधा मतलब है कि सरकार के पास उपलब्धि के नाम पर कुछ नहीं बचा है और ये (प्रधानमंत्री) धामिर्क ध्रुवीकरण के नाम पर अपनी राजनीतक रोटियां सेंकना चाह रहे हैं, लेकिन इस देश के लोग संजीदा भी हैं एवं विद्वान भी, जो ऐसे मंसूबों को भलीभांति समझते हैं। पूंजीपतियों से मित्रता के मामले में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से तुलना करने को लेकर तिवारी ने प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लिया और कहा कि किसी भी नेता को राष्ट्रपिता से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए।

पूंजीपति-पूंजीपति में है फर्क : तिवारी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी पूंजीपतियों को अपने साथ रखते थे, लेकिन सवाल यह है कि किस तरह के पंजूीपति। ये वे लोग थे जिन्होंने अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई में अपना सब कुछ ताक पर रखकर महात्मा गांधी और कांग्रेस का साथ दिया था। वे लोग ऐसे पूंजीपति नहीं थे जो बैंकों को पैसा लेकर विदेश भाग गये। पूंजीपति और पूंजीपति में फर्क है।

उन्होंने कहा कि जो लोग बैंकों को लूटकर एंटीगुआ चले जाते हैं, लंदन चले जाते हैं, पृथ्वी से आलोप हो जाते हैं और मोदी को लगता है कि वैसे लोगों के साथ तस्वीर खिंचवाना सही है तो इसे वह प्रधानमंत्री के विवेक पर छोड़ते हैं। कांग्रेस पूंजीपतियों के खिलाफ नहीं, बल्कि दोस्ताना पूंजीवाद के खिलाफ है।

देश की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है : पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी ने विकास पर लंबा-चौड़ा भाषण दिया, लेकिन सवाल उठता है कि यदि देश में विकास हो रहा है तो अर्थव्यवस्था क्यों चरमरा रही है? क्यों किसानों को अपने उत्पाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम पर बेचनी पड़ रही है, क्यों छोटे और मझोले उद्योग देश में बंद हो रहे हैं, क्यों नौजवान को नौकरी नहीं मिल रही है?

तिवारी ने कहा, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कहते हैं कि हमारी सरकार में 12 करोड़ लोगों को मुद्रा योजना के तहत ऋण दिये गये हैं, लेकिन सवाल उठता है कि उन 12 करोड़ ऋण के माध्यम से दीर्घकालिक आजीविका के कितने साधन पैदा किये गये हैं? क्या सरकार के पास कोई आंकड़ा हैं कि जो उसने 12 करोड़ लोगों को ऋण दिये उससे मुल्क में कितने व्यवसाय और रोजगार पैदा हुए?

मुजफ्फरपुर बाल गृह का मुद्दा भी उठााया : उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को मुल्क को बहकावे में रखने की बजाय लडख़ड़ाती अर्थव्यवस्था के सच से देश को अवगत कराना चाहिए। झूठे वायदे की सच्चाई को स्वीकार करके प्रधानमंत्री को देश से माफी भी मांगनी चाहिए। बिहार के मुजफ्फपुर में बालिका गृह यौनकांड के आरोपी ब्रजेश ठाकुर को सरकार की ओर से प्रतिवर्ष दी जाने वाली लाखों की रकम के बारे में पूछे जाने में तिवारी ने कहा कि ऐसे घिनौने और जघन्य घटनाओं में संलिप्तता की जानकारी के बावजूद आरोपी को माली सहायता मिलती रही है।

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