ज्योतिष

उपाय की अवधि और उपाय कैसे प्रभाव डालते हैं?

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715

अधिकतर उपायों की अवधि 40 दिन की होती है प्रत्येक प्रकार की पूजा 40 से 43 दिन में शुभ परिणाम देना शुरु कर देती है। इसलिए धार्मिक कृत्यों को लगातार 43 दिनों तक किए जाने की परम्परा है और यदि समस्या अधिक गंभीर हो तो इन कर्म कांडों का एक सुविधा जनक अंतराल के बाद पुनरावर्तन किया जाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि रत्न, रुद्राक्ष व अन्य अमूल्य ताबीज 43 दिन के बाद अपना शुभ परिणाम देते हैं। इन 43 दिनों के दौरान इस विशेष ताबीज, यंत्र, रुद्राक्ष या रत्न से जुड़ी पूजा व मंत्र का नियमित रूप से अनुष्ठान होते रहना चाहिए।

ग्रहों से संबंधित उपाय

ग्रहों की शांति के लिए व शुभ फल की प्राप्ति के लिए ग्रहों से संबंधित दान किया जाता है। यज्ञ, रत्न व रुद्राक्ष धारण करके भी ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम कर शुभ प्रभाव प्राप्त कर सकते हैं। विशेष रूप से ग्रहों से संबंधित देवी-देवताओं की पूजा, मंत्र जाप एक निश्चित संख्या में करके अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं। यदि किसी जन्म पत्रिका में भाग्येश कमजोर हो तो उससे संबंधित रत्न, रुद्राक्ष, मंत्र जाप या देवी-देवता के पूजन आदि से भाग्य को प्रबल किया जा सकता है। ग्रहों की अत्यधिक शुभता प्राप्त करने के लिए भी यह उपाय किए जा सकते हैं।

विशेष समय हेतु उपाय

जब किसी व्यक्ति को दशा-अंतर्दशा गोचर या जन्मपत्रिका में अशुभ ग्रह शनि, मंगल, राहु से परेशानी हो रही हो या शनि की ढैय्या साढ़ेसाती का समय हो तो उस समय ग्रह की अनुकूलता के लिए उपाय के रूप में यज्ञ, मंत्र, जप, स्तोत्र, रत्न, रुद्राक्ष और व्रत करके अशुभ समय के कुप्रभाव को कम किया जा सकता है।

मनोकामना पूर्ति उपाय

विभिन्न इच्छाओं की पूर्ति के लिए शास्त्रों में विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान, यज्ञ, मंत्र जप, स्तुति पाठ व व्रत आदि का विधान बताया गया है। प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में चारां पुरुषार्थों धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की सिद्धि तथा स्वास्थ्य लाभ, धन, ज्ञान, यश व मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए शास्त्रोक्त यज्ञ, मंत्र जप या व्रत आदि यथाशक्ति कर सकता है। इस पुस्तक में सभी महत्वपूर्ण मंत्रों, यत्रों, व्रतों विभिन्न देवताओं के फलश्रुति सहित पाठ तथा अन्य शास्त्र सम्मत् उपाय सामग्री का प्रभाव सहित वर्णन किया गया है।10 द्य बृहत उपाय संहिता

उपाय कैसे प्रभाव डालते हैं?

जब एक मरीज चिकित्सक के पास इलाज के लिए जाता है तो सबसे पहले चिकित्सक समस्या की तह तक पहुंचकर बीमारी का निदान करने हेतु दवाएं बताता है। यदि बीमारी चिरकालिक है तो चिकित्सक यह भी कह सकता है कि इस बीमारी का इलाज चिकित्सा शास्त्र में नहीं है। इसी तरह यदि व्यक्ति को मृत्यु का भय हो तो उसकी कुण्डली के अनुसार उन परिस्थितियों में शास्त्रोक्त उपाय जैसे महामृत्युंजय यज्ञ द्वारा आकस्मिक मृत्यु या दुर्घटना को रोका जा सकता है, परंतु यदि उस व्यक्ति के भाग्य में उतना ही जीना लिखा है तो उपाय व उपचार उसे नहीं बचा सकते और इस स्थिति में केवल ईश्वर ही उसकी रक्षा कर सकता है। उदाहरण के लिए सावित्री अपने सत्यवान को मौत के मुंह से निकाल कर लाई थी। सही कहा गया है कि :
औषधि मणि मंत्राणां ग्रह नक्षत्रा तारिका।भाग्यकाले भवेत्सिद्धि अभाग्यम् निष्फलम भवेत्।।

औषधि, मंत्र और रत्न समस्याओं व उन बीमारियों को कम करता है जो अशुभ ग्रह व नक्षत्रों के कारण होते हैं। यदि समय अनुकूल है तो ये उपाय सहायक सिद्ध होते हैं। यदि समय प्रतिकूल हो तो ये उपाय काम नहीं करते।

विशेष उपाय

भाग्य को बदलने के लिए कई उपाय हैं जैसे : किसी विशेष समस्या का समाधान, किसी रोग का निवारण करना, किसी कमजोर ग्रह को ताकत देना, जीवन को उŸाम बनाना और आध्यात्मिक एवं संसारिक क्षेत्र में सफलता पाना। ये उपाय, ब्रह्मा, श्रीकृष्ण, महर्षि पराशर, महर्षि जैमिनी, दŸात्रेय, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि वेदव्यास, शिवजी, हनुमान, देवऋषि नारद, देवगुरु वृहस्पति, दैत्य गुरु शुक्राचार्य एवं कपिल आदि ऋषि, योगी, संत व पंडितजन द्वारा संस्तुत किए गए हैं।

ग्रहों के विशेष उपाय
चयन प्रक्रिया

ज्योतिषी को सही समय पर सही उपाय सही मुहूŸार् में बताना चाहिए। उपाय का चयन दो बातों पर निर्भर करता है।

उपाय करने वाले की जरूरत
एक व्यक्ति की कोई विशेष इच्छा, विशेष समस्या जैसे : ऋण, रोग, मुकद्मा आदि हो सकती है और अगर उसे कोई ऐसा उपाय मिले जिससे उसे सहायता एवं राहत मिल सके तो वह अवश्य ही प्रसन्न होगा।

ज्योतिषीय आवश्यकता

यदि कोई ज्योतिषी कुण्डली में ग्रहों व दशाओं में कोई त्रुटि देखता है तो उसे जातक को इसके बारे में आगाह करना चाहिए व कुछ कारगर उपाय भी बताने चाहिए। उपायों का चयन आखिरकार जातक की सहमति से मूलभूत सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए। ये सिद्धांत ज्योतिषी की सहयोग से रत्नों, रुद्राक्ष, यंत्र, मंत्र, स्तोत्र, माला एवं रहस्यमयी वस्तुएं जैसे ताबीज, लॉकेट, फेंगशुई, पिरामिड, सिक्का, शंख, अंगूठी, धातु रंग, जड़ी-बूटी, गंगाजल इत्यादि सारे उपाय स्वच्छंद रूप से बताए जा सकते हैं मगर यदि समस्या अधिक गंभीर हो तो जातक को यज्ञ करने की सलाह दी जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति कोई विशेष उपाय करने में असमर्थ है, तो उसे दूसरे उपाय बताए जा सकते हैं जो अधिक साध्य हैं।

उपाय सामर्थ्य के अनुसार होते हैं

• सूर्य के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए मातंगी देवी का पूजन किया जाता है।
• विष्णु देवता या सूर्य देवता की पूजा करनी चाहिए।
• चंद्र के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए भुवनेश्वरी देवी या शिवजी का पूजन किया जाए।
• मंगल के दोष को कम करने के लिए बगलामुखी देवी, दुर्गा देवी, हनुमानजी, कार्तिकेय या नरसिंहजी की पूजा की जानी चाहिए।
• राहु के दोष को कम करने के लिए छिन्नमस्ता, दुर्गा या सरस्वती देवी का पूजन किया जाता है।
• गुरु के लिए तारा देवी का पूजन किया जाता है।
• शनि के लिए काली, शिवजी, भैरव व श्रीकृष्ण की उपासना करनी चाहिए।
• बुध के लिए त्रिपुरसुंदरी देवी, त्रिपुर भैरवी या विष्णु भगवान का ध्यान करना चाहिए।
• केतू के लिए धूमावति देवी की पूजा करनी चाहिए।
• लग्न को बली करने के लिए शास्त्रों में त्रिपुरभैरवी साधना का विधान वर्णित है।
इन देवी देवताओं की पूजा अर्चना भिन्न-भिन्न विधियों से की जाती है। जिनमें मंत्रोच्चारण, यज्ञ, स्तोत्र व जप शामिल है।

उपाय क्यों?

एक व्यक्ति की कोई विशेष इच्छा, विशेष समस्या जैसे- ऋण, रोग, मुकद्मा आदि हो सकती है और अगर उसे कोई ऐसा उपाय मिले जिससे उसे सहायता एवं राहत मिल सके तो वह अवश्य ही प्रसन्न होगा।

ग्रह और राशितत्व अनुसार उपाय

• यदि ग्रह की राशि अग्नि तत्व है तो यज्ञ व व्रत से लाभ होगा।
• यदि ग्रह की राशि पृथ्वी तत्व है तो रत्न, यंत्र, धातु धारण करना और देव दर्शन करना चाहिए।
• यदि ग्रह की राशि वायु तत्व हो तो मंत्र जाप, कथा व पूजा लाभकारी साबित होगी।
• यदि वह जल तत्व राशी में हो, तो दान दक्षिणा व जल विसर्जन और औषधि स्नान प्रभावकारी होगा।
• यदि कुंडली में योगकारक ग्रह बलवान हो तो रत्न व यंत्र को धारण करना, पूजा करना, मंत्रों का उच्चारण करना सही उपाय है।
• यदि मारक ग्रह बलवान् है तो वस्तुओं का दान व जल विसर्जन किया जाना चाहिए या फिर इन ग्रहों को मंत्रोच्चारण व देव दर्शन के द्वारा शांत किया जा सकता है।

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