छत्तीसगढ़

ATM मशीन से हुई त्रुटि के लिये आम आदमी को कितना परेसानी होती होगी..?

ATM मशीन से हुई त्रुटि के लिये एक गरीब आदमी को कितना परेसानी होता होगा, ये वह आदमी ही बता सकता है

तृषा साहू

रायपुर : ATM मशीन से हुई त्रुटि के लिये एक गरीब आदमी को कितना परेसानी होता होगा, ये वह आदमी ही बता सकता है, ऐसे समय मे बैंक से मदद की उम्मीद रहती है कि उनके मेहनत पसीने की कमाई का पैसा वापस मिल जाये, परन्तु बैंक के अधिकारी पीड़ित को ऐसे घुमाते है, जैसे उसी ने ही ATM की रकम को गबन की हो, जबकि वास्तविकता ऐसा नही होता है, …

ऐसा ही एक मामले में जवाहर पारा बालोद के फोर्थ ग्रेड कर्मचारी सांता उर्फ विजयेंद्र भारती के साथ हुआ है, शांता की पत्नी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो उसने अपने मेहनत पसीने की कमाई से एक एक रुपया बचा कर रखी हुई रकम को इलाज के लिए निकालने 2 जून 2020 को मधु चौक बालोद में स्थित एचडीएफसी एटीएम में ₹20000 निकालने गया था उन्होंने अपनी सुविधा के अनुसार प्रथम बार 10000 निकालने के बाद पुनः ₹10000 निकालने के लिए एटीएम से आवश्यक प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद एटीएम मशीन ने “लेन-देन अस्वीकृत” होने की रसीद उन्हें देने पर वह अपने गंतव्य की ओर चला गया था, परंतु उसी दिन दोपहर में उनके खाता से ₹20000 आहरण होने की smg आने पर उस गरीब का होश उड़ गया,

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सदमे में तुरंत भारतीय स्टेट बैंक बालोद में आकर शाखा प्रभारी को तत्काल इस घटना की जानकारी देते हुए लिखित शिकायत किया था परंतु, संबंधित बैंक के असंवेदनशील अधिकारी के द्वारा जांच के नाम पर जीरो बटा सन्नाटा कहावत को साबित करते हुए 16 जुलाई 20 को स्पष्ट तौर से कह दिया कि आपने पूरे ₹20000 का आहरण किया है, इस कारण से हमारी संस्था आपकी मदद करने में असमर्थ है,

शांता भारती को अपनी पत्नी के इलाज के लिए पैसे की सख्त आवश्यकता थी, उन्होंने तत्काल ऊंचे ब्याज दरों पर पैसा लेकर अपनी पत्नी का इलाज कराते रहा, इसी दरमियान किसी ने अधिवक्ता भेष कुमार साहू से मिलकर निराकरण की सलाह देने पर उन्होंने साहु अधिवक्ता से मिलकर अपनी पीड़ा बताया तब अधिवक्ता ने संबंधित बैंक को विधिक नोटिस भेज कर सात दिवस में ही ₹50000 क्षतिपूर्ति सहित मूल रकम ₹10000 को वापस करने के लिए बैंक को निर्देशित किया था अन्यथा, सक्षम न्यायालय में कार्यवाही करने की चुनौती दी थी,

वकील की उपरोक्त नोटिस जाने के बाद बैंक में मची थी हड़कंप, अधिकारी कर्मचारियों में था अफरा-तफरी, परिणाम नोटिस मिलने के 12 दिन के अंदर ही पीड़ित शांता भारती के खाता में बैंक ने डाले ₹10000 रु, अधिवक्ता के उपरोक्त विधिक कार्यवाही से खुश होकर पीड़ित और उसके मोहल्ले वालों ने उन्हें बधाई दी, यह केस अधिवक्ता ने अपने सामाजिक दायित्वों के तहत पीड़ित की ओर से नि:शुल्क लड़ाई की है।

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