कैसे लड़ेंगे तीसरी लहर से जब छत्तीसगढ़ सरकार सर्दी खांसी की दवा की व्यवस्था कर पाने में विफल हैं- भाजपा

क्या कारण रहा कि दवा खरीदी के लिए जारी निविदा एक नहीं दो नहीं पांच-पांच बार निरस्त कर दी गयी?

भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ट के संयोजक डॉ. चोपड़ा ने कहा सर्दी खांसी की दवा नहीं और छत्तीसगढ़ सरकार कोरोना से लड़ने, ब्लैक फंगस से निपटने और तीसरी लहार के लिए तैयार होने की हवा हवाई बात करें तो यह अपने आप में चिंता का विषय हैं और दुर्भाग्यपूर्ण भी हैं

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के चिकित्सा प्रकोष्ट के संयोजक डॉ. विमल चोपड़ा ने बीते ढाई वर्षों में स्वास्थ्य के मामले में प्रदेश सरकार को विफल बताया हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ बीते लगभग डेढ़ वर्षों में कोरोना के विरुद्ध लड़ाई और ऐतियातन कदम उठाने स्वास्थ्य सुविधा की दृष्टि से पर्याप्त व्यवस्था करने में प्रदेश सरकार की लापरवाहियां खुल कर जनता के सामने आ चुकी हैं। ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था, पर्याप्त बिस्तर और वेंटिलेटर की व्यवस्था में प्रदेश सरकार की लापरवाहियों का खामियाजा प्रदेश की जनता ने भुगत हैं। वहीं वर्तमान में कोरोना के तीसरी लहार की आशंका के बीच प्रदेश में सामान्य बीमारियों सर्दी खांसी की दवाओं का आभाव ना सिर्फ चिंता का विषय हैं अपितु प्रदेश सरकार की लापरवाही और प्रदेश की जनता के प्रति गैरजिम्मेदाराना रवैय्ये और असंवेदनशीलता का प्रमाण हैं।

भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ट के प्रदेश संयोजक डॉ. विमल चोपड़ा ने प्रदेश में कोरोना के तीसरी लहर की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ में दवाओं की कमी की खबर पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि विज्ञापनों में तीसरी लहर की तैयारी करने वाली छत्तीसगढ़ सरकार को जवाब देना चाहिए की जब प्रदेश में सर्दी खांसी की दवा की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही तो कोरोना से कैसे लड़ेगी? उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल हेल्थ स्किम और मोहल्ला क्लिनिक के फार्मूले पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने का ढोल पीटने वालों के राज में छत्तीसगढ़ की जनता को छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों और सीएचसी, पीएचसी से दवा नहीं मिल रही हैं। दुर्भाग्यपूर्ण हैं कि मरीजों को सरकारी अस्पतालों में पर्ची थमा कर बाहर से महंगी दवा खरीदने कहा जा रहा हैं।

भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ट के प्रदेश संयोजक डॉ. विमल चोपड़ा ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से सवाल करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवा खरीदी इतने निम्न स्तर तक कैसे पहुंच गयी की राज्यभर से दवा की कमी की खबर निकल कर सामने आ रही हैं। क्या कारण रहा कि दवा खरीदी के लिए जारी निविदा एक नहीं दो नहीं पांच-पांच बार निरस्त कर दिया गया? कहीं कोरोना काल में दवा खरीदी जैसे संवेदनशील विषय पर कोई भ्रष्टाचार का अवसर तो नहीं तलाशा जा रहा हैं? डॉ. विमल चोपड़ा ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से दवा खरीदी जैसे संवेदनशील विषय पर गम्भीरता दिखाने व शीघ्र दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि लगातार कोरोना की मार झेलने के बाद भी ऐसी लापरवाही देख कर छत्तीसगढ़ सरकार की तीसरी लहर से लड़ाई की तैयारी और दावों की सच्चाई पर से जनता का विश्वास करना नामुमकिन हैं। सर्दी खांसी की दवा नहीं हैं और छत्तीसगढ़ सरकार कोरोना से लड़ने की ब्लैक फंगस से निपटने की और तीसरी लहर के लिए तैयार होने की हवा हवाई बात करें तो यह अपने आप में चिंता का विषय हैं और दुर्भाग्यपूर्ण भी हैं।साथ ही कई जन औषधि केंद्र भी बंद होने से जनता महंगे दामो पर दवाईयां खरीदने मजबूर है और इस कोरोनाकाल में अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेल रहे है।

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