टेक्नोलॉजी

नई एल्गोरिथम वाले गूगल में बेहतर रैंकिंग कैसे पा सकते हैं

गूगल की सर्च में सबसे ऊपर आना आज की तकनीक की दुनिया में बड़ी उपलब्धि है. मगर गूगल समय-समय पर अपने सर्च इंजन की एल्गोरिथम बदलता रहता है. एक समय में टैग, एसईओ और तमाम दूसरे तरीकों के जरिए गूगल सर्च के पहले पेज पर कई ऐसे रिजल्ट भी आ जाते थे, जिनका विषय से सीधा संबंध नहीं होता है. गूगल ने हाल ही में अपनी एल्गोरिथम बदली है. अब

गूगल सर्च के पहले पन्ने पर आने के लिए पहले से ज्यादा मेहनत करनी होगी. जानिए गूगल सर्च में बेहतर रैंकिंग के लिए किन बातों का ध्यान रखना पड़ेगा.
क्लिक करने वालों की संख्या

कई वेबसाइट्स की पहले की रैंकिंग के चलते गूगल उनके रिजल्ट पहले पेज पर दिखाता है. लेकिन अगर अब उन पर आने वाले क्लिक की गिनती नीचे दिखने वाली वेबसाइट्स से कम होगी तो गूगल ऐसे लिंक्स को पहले पेज से हटा देगा.
बाउंस रेट

नई एल्गोरिथम में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण चीजों में से एक बाउंस रेट है. मतलब एगर आपकी वेबसाइट पर जाकर कोई वापस गूगल पर सर्च आ जाए तो गूगल मानेगा कि आपके लिंक में उस विषय की पूरी या सही जानकारी नहीं है.
एवरेज टाइम

किसी भी लिंक पर क्लिक करने के बाद जितनी ज्यादा देर कोई यूजर आपकी वेबसाइट पर टिका रहेगा, गूगल आपकी वेबसाइट को उतनी अच्छी रैंकिंग देगा.
ट्रैफिक सोर्स

गूगल चाहता है कि आपकी वेबसाइट पर अलग-अलग सोर्स से लोग आएं. उदाहरण के लिए अगर किसी एक वेबसाइट पर एक दिन में 1,000 लोग सिर्फ फेसबुक से आते हैं और दूसरी पर कुछ ट्विटर, कुछ फेसबुक, कुछ ईमेल और कुछ गूगल से आते हैं तो गूगल दूसरी वाली वेबसाइट को बेहतर रैंकिंग देगा. गूगल का मानना होगा कि अलग-अलग तरह के लोग आपकी वेबसाइट पर मौजूद सूचना को प्रामाणिक मानते हैं.

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गूगल में बेहतर रैंकिंग
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