ईश्वर रूपी समुद्र में मनुष्य तरंगे हैं : स्वामी सदानंद सरस्वती

जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम रायपुर में ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपनान्द सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि तथा द्वारका पीठ के मंत्री दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती 24 अप्रैल की शाम को नियमित विमान से रायपुर पधारे हैं जिनका विमानतल पर शंकराचार्य आश्रम तथा भगवती राजराजेश्वरी मंदिर रायपुर के प्रमुख ब्रह्मचारी डॉ इंदुभावानंद, एमएल पांडेय, नरसिंह चंद्राकर व आदि ने स्वागत किया और शंकराचार्य आश्रम में पधारे जहां उनका पादुका पूजन आचार्य धर्मेंद्र महाराज ने सम्पन्न किया।

इस मौके पर संजय अग्रवाल, डीपी तिवारी, श्रीकृष्ण तिवारी, ज्योति नायर, कुसुम सिंघानिया, गौतम मिश्रा, रत्नेश शुक्ला, सोनू चंद्राकर, मयंका अनिल पांडेय, मठ के पुरोहित राम कुमार शर्मा व आदि भक्तगण विशेष रूप से उपस्थित थे। स्वामी सदानंद सरस्वती ने अपने आशीर्वचन में भक्तों से कहा कि – ईश्वर रूपी समुद्र में मनुष्य तरंगे हैं।

जैसे तरंग जल से भिन्न नहीं है, दाहगता अग्नि से भिन्न नहीं है, प्रकाश सूर्य से भिन्न नहीं है ठीक उसी प्रकार जीव ईश्वर से भिन्न नहीं हो सकता। आगे उन्होंने कहा कि मान लीजिए कुम्हार ने एक हजार घड़े बनाये, वे घड़े जरूर अलग अलग दिखाई पड़ते हैं लेकिन उन घड़ों का जल एक ही है। इसी तरह से मनुष्य रूपी घट में, देह रूपी घट में ईश्वर विद्धमान है। अंत मे उन्होंने कहा – “आए एक ही घाट से, उतरे एक ही घाट; हवा लगी संसार की हो गई बाराबाट “।

उक्त जानकारी शंकराचार्य आश्रम रायपुर के समन्वयक व प्रवक्ता पं रिद्धीपद ने विज्ञप्ति जारी करके दी और सभी भक्तों से आग्रह किया कि 28 अप्रैल को दुबे कॉलोनी मोवा में बालाजी भगवान के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर पूज्य दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती शाम 5 बजे प्रवचन देंगे साथ ही भक्तों को आशीर्वचन प्रदान करेंगे जिस हेतु वे उपस्थित रहे।

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