वन विभाग के नाक तले सैकड़ों पेड़ों की हो गई कटाई, अधिकारियों को भनक तक नही

अरविन्द शर्मा:

कटघोरा: कटघोरा वन मंडल अपने गैरजिम्मेदाराना कार्यशैली से अक्सर चर्चा का विषय बना रहता है।पूर्व में भी विभाग के कई बड़े कारनामे उजागर हो चुके हैं बावजूद विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के कानों में शायद जु तक नही रेंगी है,बड़े कुनबे का यह विभाग आखिरकार कब अपनी जिम्मेदारियों का बोध प्राप्त करेगा?

कटघोरा वनमंडल के अधीनस्थ वनपरिक्षेञ जड़गा शुरुआती दौर से ही अनेको कारनामो का गढ़ रहा है,यहाँ परिक्षेञ के अंतर्गत ग्राम डूमरमुड़ा के जंगलों में बेश कीमती सैकड़ो पेड़ो की कटाई खुलेआम चल रही है यहाँ विभाग द्वारा सागौन के बड़े बड़े प्लाटों का रोपण भी किया गया है और ये पौधे अभी पूर्ण परिपक्व अवस्था में कदम भी नही रख पाए थे कि अज्ञात चोरों ने इनकी बली चढ़ा दी।ये सारा खेल कोई भीषण जंगल मे नही चल रहा है जहाँ किसी को कानो कान खबर भी ना हो..बल्कि गौरेला पेंड्रा मुख्यमार्ग से लगे डूमरमुड़ा के वनों में चल रहा है, जहाँ से विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों सहित विभागीय अमले का सैकड़ो बार गुजरना होता है, अब यहाँ पेड़ो के ठूठ शायद इन्हें नजर नही आते होंगे,लेकिन ये हैरत की बात है कि यहाँ बसी बस्ती के घरों के आंगन में मौजूद बड़े बड़े पेड़ो के लट्ठे भी इन्हें नजर नही आते,जिन्हें चिरान कर बस्ती निवासी मोटी आय का स्रोत बनाकर अपनी जीविकोपार्जन का साधन बना लिए है।

जब बस्ती के लोगो से इस विषय पर चर्चा की गई तो उन्होंने जो जवाब दिया वह हैरत में डाल देने वाला था,इन्होंने बताया कि हम केवल गिरे पड़े पेड़ो को ही लाते हैं और इनकी कटाई कोई और करता है। हम केवल घर बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं,जब इनसे पूछा गया की गिरे पड़े लकड़ियों को लाने के लिए विभाग से किसी तरह की परमिशन लेते हैं तो जवाब गोलमोल शुरू हो गया,यहाँ यह बताना लाजमी होगा कि पूर्व में ऐसे ही बांस के गिरे पड़े लकड़ियों के इस्तेमाल का दंश विभाग ने जमकर झेला था,जिसमे बीटगार्ड ने रेंजर को कानून का पाठ पढ़ा दिया था।तो बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन ग्रामीणों को इतना साहस कहा से मिल रहा जो गिरे पड़े कहकर हरे भरे पेड़ो की बलि चढ़ा कर जीविकोपार्जन का स्रोत बना विभाग की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।

यहाँ निवासरत बस्ती के अधिकांश घरों ने वनों से एकत्र की हुई लड़की,गोले,चिरान मिल जाएगी।बड़े बड़े गोले व बल्लियों को हाथ मशीन द्वारा घरों में ही चिरान कर उन्हें उपयोग में लाया जाता है।सूत्र बताते हैं की यहां सागौन का बड़ा प्लाट मौजूद हैं जिससे सागौन की कटाई कर रसूखदारों को बिक्री कर दीं जाती है।यह सारा खेल विभाग की निष्क्रिय कार्यशैली को उजागर करता है। किसी निजी कार्य के दौरान अगर कोई वृक्ष अवरोध बन जाये तो उसे हटाने या काटने के लिए विभाग से अनुमति लेना किसी टेढ़ी खीर से कम नही होता है सालों विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद ही उसकी अनुमति संभव हो पाती है।अब बिना परमिशन के अवैध रूप से वनों की इमारती व बेश कीमती वृक्षों की कटाई कर देना कितना बड़ा अपराध है यह तो विभाग भलीभांति समझ रहा है लेकिन ऐसे अपराधियो पर विभाग कब और कैसे नकेल कसेगा यह देखने वाली बात होगी।वन अमले को इस छेत्र में दबिश देकर यहाँ हुई वृक्षों की कटाई मामले की उचित जांच करनी चाहिए और आरोपियों पर आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए।

वनमंडलाधिकारी शमा फारूकी ने पूर्व में कई अवैध चिरानो को लेकर आवश्यक विभागीय कार्यवाही करते हुए मशीन व चिरान जप्त किया है। कई मामलों पर वनमंडलाधिकारी स्वयं विजिट कर जांच करती देखी गई है जिसमे विभागीय निर्माण कार्य, पौधा रोपण,स्टॉप डेम व अन्य कार्य सामिल है।इस मामले पर वनमंडलाधिकारी का क्या रुख रहेगा और दोषियों पर विभाग क्या कार्यवाही करेगा यह देखने वाली बात होगी।

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