ओलिम्पिक में 28 मेडल जीतने वाले माइकल फेल्प्स खुद की जान लेना चाहता था, जाने क्यों?

ओलिम्पिक में 28 मेडल जीतने वाले माइकल फेल्प्स खुद की जान लेना चाहता था, जाने क्यों?

जालन्धर : ओलिम्पिक में रिकॉर्ड 28 मेडल जीतने वाले अमरीका के स्विमर माइकल फेल्प्स ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि वह जब अपना पहला ओलिम्पिक पदक जीते थे तब वह डिप्रैशन का शिकार थे। जैसे-जैसे वह आगे जीतते गए, डिप्रैशन बढ़ता गया। इस कारण एक समय ऐसा भी आया जब उनका नाम दुनिया के सबसे बड़े खिलाडिय़ों में आने लगा तब भी वह अपने कमरे से हफ्तों बाहर नहीं निकल पाते थे। कई-कई दिन वह कमरे में बैठ दीवारों को देखते रहते या सोते रहते थे। इस दौरान किसी से बात नहीं की। ज्यादातर अकेले ही रहे। उक्त बात माइकल फेल्प्स शिकागो में हुई मैंटल हैल्थ कांफै्रंस में कही।

हर ओलिम्पिक के साथ बढ़ता गया डिप्रैशन : 15 साल की उम्र में 2000 ओलिम्पिक में हिस्सा लेने वाले फेल्प्स ने कहा कि उक्त ओलिम्पिक में मैडल न मिलने से वह बहुत हताश थे। इस घटनाक्रम ने मुझ में सफलता की इतनी भूख भर दी कि मैं हर समय जीत के बारे में ही सोचता रहता था। इसके बाद जब 2004 ओलिम्पिक में मैंने अच्छा प्रदर्शन किया तो बढ़ती उम्मीदों और खुद को बेहतर बनाए रखने की जिद्द ने मुझे डिप्रैशन की ओर धकेल दिया।

कार एक्सीडैंट और डोपिंग के आरोपों ने झकझोर दिया : 2004 में फेल्प्स को नशे में कार चलाने के आरोप में पकड़ा गया था। फेल्प्स ने कहा कि यह मेरी जिंदगी का टॄनग प्वाइंट रहा। इसके बाद 2008 के ओलिम्पिक से पहले उनके असामान्य शरीर को लेकर बातें हुईं कि फेल्प्स प्रतिबंधित दवाइयां ले रहे हैं। फेल्प्स ने कहा कि बेकसूर होते हुए भी मुझे खुद को पाक साबित करने के लिए एंटी डोप के 9 टैस्ट देने पड़े। इनमें मैं पास तो हो गया लेकिन लोगों की नजरों में खुद को छोटा समझने लगा।

मेरे तनाव का कारण मैं खुद ही था ; 2012 ओलिम्पिक के बाद मेरी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। मैं आगे खेलना नहीं चाहता था। कहीं से भी मन को शांति नहीं मिल रही थी। मैं अपने कमरे में कैद रहा। अकेला रहने की कोशिश की। कभी-कभी तो ख्याल आए कि खुद को ही खत्म कर लूं। फिर मुझे समझ आया कि मुझे ट्रीटमैंट की जरूरत है। मैं इलाज कराने गया। इलाज के पहले दिन मैं बहुत परेशान था। मैं सबसे हाथ मिलाकर नॉर्मल होने का दिखावा कर रहा था। ट्रीटमैंट वाले दिन सुबह 6 बजे मुझे नर्स ने जगा दिया। आम तौर पर मैं इतनी जल्दी उठता नहीं था। नर्स ने कहा कि अब आप कैसा महसूस कर रहे हो। मैं गुस्से में आ गया और कहा कि मुझे इतनी जल्दी उठने की आदत नहीं है। नर्स ने कहा कि वह सिर्फ अपना काम कर रही है। उसके लिए उन्हें तैयार तो होना ही पड़ेगा न। ट्रीटमैंट पीरियड के बाद मैं उस नर्स वाले घटनाक्रम को याद करने लगा तो समझा कि मैंने दूसरों की उम्मीदें पूरी करते-करते खुद को भुला दिया। मेरी ज्यादा उम्मीदों ने भी मुझे तनाव ही दिया। अब सोचता हूं कि यह बात मुझे पहले समझ आ जाती तो मैं इतने साल तनाव में न रहता।

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