मैं विकास दुबे हूँ कानपुर वाला, गाड़ी पलटी तो विकास ने की भागने की कोशिश

घटना के वक्त कानपुर में भौती इलाके में हो रही थी बारिश

कानपुर: मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपी विकास दुबे को कानपुर लाते समय पुलिस की गाड़ी रास्ते में पलट गई. इस दौरान विकास दुबे ने पुलिस के एक जवान से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की. विकास दुबे और पुलिस के बीच गोलियां चली. इस दौरान विकास दुबे गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

बारिश की वजह से पलटी गाड़ी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाड़ी में ड्राइवर के अलावा तीन एसटीएफ के जवान थे। घटना के वक्त कानपुर में भौती इलाके में बारिश हो रही थी। बारिश हल्की थी। लिहाजा, संकरी सड़क पर कीचड़ की वजह से तेज रफ्तार गाड़ी पलटी।

विकास पिछली सीट पर बीच में बैठा था। उसके दोनों तरफ एसटीएफ के जवान थे। गाड़ी पलटी तो विकास ने भागने की कोशिश की। एक पुलिसकर्मी की 9 एमएम की पिस्टल लेकर भागा। पलटकर गोली चलाई। एसटीएफ की जवाबी फायरिंग में एक गोली उसकी कमर और दूसरी सीने में लगी।

दो पुलिसकर्मी भी घायल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसटीएफ के दो जवान भी इस घटना में घायल हुए हैं। बताया जाता है कि विकास दुबे हैलट हॉस्पिटल पहुंचने के पहले जिंदा था। हालांकि, उसकी हालत बेहद गंभीर थी। कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया। घटना के वक्त विकास वही नीली धारी वाली फुल टी-शर्ट और लोअर पहने था, जो उसने गुरुवार को उज्जैन में गिरफ्तारी के वक्त पहने नजर आया था।

22 मिनट बाद मौत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विकास को एनकाउंटर के बाद सीधे एक गाड़ी से अस्पताल ले जाया गया। यह गाड़ी एसटीएफ के काफिले में शामिल थी। इसी गाड़ी में एसटीएफ के दो घायल जवान भी थे।हॉस्पिटल पहुंचने के 20 से 22 मिनट बाद ही विकास की मौत हो गई। हालांकि, इसकी पुष्टि काफी देर बाद की गई। जानकारी के मुताबिक, दोनों एसटीएफ जवानों को फौरन आईसीयू में एडमिट कराया गया। एक जवान की हालत गंभीर बताई गई है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिसवालों की हत्या के अभियुक्त विकास दुबे को आख़िरकार मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ़्तार कर लिया गया. विकास दुबे की गिरफ़्तारी कानपुर में हुए गोलीकांड के सात दिन बाद हो पाई है.

पर्ची में नाम विकास दुबे ही लिखवाया गया. विकास के पास एक बैग था. वो मंदिर के सामने प्रसाद की एक दुकान पर भी गए. विकास अपना बैग कहीं रखना चाहते थे. एक व्यक्ति से विकास ने बैग रखने की जगह भी पूछी.

विकास के दो साथियों को भी किया गया गिरफ़्तार

उसके बाद विकास दर्शन करने के लिए मंदिर के अंदर पहुँचे. इस दौरान सिक्यॉरिटी गार्ड को शक हो चुका था और पुलिस को भी सूचना दे दी गई थी. जब विकास दुबे बाहर निकले तो पुलिस आ चुकी थी और उन्हें हिरासत में ले लिया गया. विकास के दो साथियों बिट्टू और सुरेश को भी गिरफ़्तार किया गया है लेकिन अभी तक उनके बारे में ज़्यादा नहीं बताया गया है.

पुलिस के एक अधिकारी का दावा है कि उज्जैन में आकर महाकाल मंदिर में जाने की वजह यह थी कि विकास पुलिस के साथ मुठभेड़ से बचना चाहते थे. वहीं यह भी जानकारी मिली है कि वो मंदिर परिसर में सुबह काफ़ी देर तक घूमते रहे.

पुलिस जब उन्हें गिरफ़्तार करके ले जा रही थी तो वे चिल्ला रहे थे, “मैं विकास दुबे हूँ कानपुर वाला.”

विकास दुबे को गिरफ़्तारी के बाद महाकाल थाने ले जाया गया. इस दौरान भी विकास ने मीडिया से बातचीत करने की कोशिश की. वहाँ विकास ने फिर चिल्लाकर कहा कि वो ‘विकास दुबे है कानपुर वाला.’ पुलिस ने विकास को चुप कराया.

विकास को थाने ले जाकर काफ़ी देर तक पूछताछ करती रही

वहीं पुलिस विकास को थाने ले जाकर काफ़ी देर तक पूछताछ करती रही. बताया जाता है कि पुलिस पूरी तरह से आश्वस्त हो जाना चाहती थी कि जिसे पकड़ा गया है वो विकास दुबे ही है.
जिस व्यक्ति के पीछे पिछले एक हफ्ते से कई प्रदेशों की पुलिस लगी हो, वो इतनी आसानी से कैसे अपनी गिरफ़्तारी दे सकता है, इसलिए उनसे सख़्ती से पूछताछ की गई.

इसके बाद मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी बयान दिया कि विकास दुबे की गिरफ़्तारी की जा चुकी है. हालाँकि उन्होंने ये नहीं बताया कि गिरफ़्तारी किन हालातों में हुई और पुलिस को कैसे जानकारी मिली.

क्रूरता की हदें शुरू से पार कर रहा था

नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में कहा, “अभी वो पुलिस की गिरफ़्त में है. गिरफ़्तारी कैसे हुई, इसके बारे कुछ भी कहना सही नहीं है. वो क्रूरता की हदें शुरू से पार कर रहा था. इंटेलिजेंस की जहाँ तक बात है, अभी इस पर कुछ भी कहना सही नही होगा. वारदात के बाद से ही प्रदेश की पुलिस पूरी तरह से अलर्ट पर थी.”

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उसके बाद ट्वीट करके विकास दुबे की गिरफ्तारी की बात कही. पुलिस सूत्रों से ये भी जानकारी मिली है कि विकास दुबे को उज्जैन पुलिस किसी अज्ञात स्थान पर ले गई है. वहीं उसे उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंपने की भी बात हो रही है.

बिकरु गाँव में गिरफ़्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला

आरोप है कि विकास दुबे ने 2 जुलाई को कानपुर के बिकरु गाँव में गिरफ़्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला किया था. पुलिस टीम पर की गई फ़ायरिंग में 8 पुलिसवालों की मौत हो गई थी. इसके बाद विकास पर इनामी राशि लगातार बढ़ाई जा रही थी. इनामी राशि बढ़कर पाँच लाख हो गई थी.

लेकिन गिरफ़्तारी होने के साथ ही मध्यप्रदेश में राजनीति भी तेज़ हो गई. जहाँ प्रदेश सरकार इसे अपनी सफलता बता रही है, वहीं कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए इसे नाकामी बताया है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “जिनको लगता है कि महाकाल की शरण में जाने से उनके पाप धूल जाएँगे उन्होंने महाकाल को जाना ही नहीं. हमारी सरकार किसी भी अपराधी को बख्शने वाली नहीं है.”

वहीं प्रदेश भाजपा ने ट्वीट किया है, “विकास दुबे उज्जैन से गिरफ़्तार, उसे शायद किसी ने बताया नहीं कि मध्य प्रदेश में अब @chouhanshivraj सरकार है, @OfficeOfKNath नहीं, जो मध्य प्रदेश में घुसने का दुस्साहस कर बैठा. @UPPolice के सभी 8 शहीदों को नमन, आपका अपराधी हमारी गिरफ़्त में है.”

उधर कांग्रेस ने कहा, “मप्र बना अपराधियों का शरणस्थल— विकास दुबे भी उज्जैन में छिपा था.”

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, “यह तो उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर से बचने के लिए प्रायोजित सरेंडर लग रहा है. मेरी सूचना है कि मध्य प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के सौजन्य से यह संभव हुआ है. जय महाकाल.”

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