चोटिल न होती तो मैं और अंक बना सकती थी – स्वप्ना

नई दिल्ली : स्वप्ना बर्मन एशियाई खेलों की हेप्टाथलन में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं लेकिन इस खिलाड़ी का मानना है कि वह कुछ स्पर्धाओं में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकी जिससे अंत में मुकाबला रोचक हो गया। इक्कीस साल की इस खिलाड़ी ने कहा- मैं ऊंची कूद, 200 मीटर, 100 मीटर बाधा दौड़ और 800 मीटर में अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं कर सकी। ऊंची कूद ऐसा खेल है जिसमें मैं सर्वश्रेष्ठ करती हूं लेकिन जकार्ता में ऐसा नहीं हुआ। मेरी किस्मत अच्छी थी की भाला फेंक में मैंने अच्छा प्रदर्शन किया जिससे उसकी भरपाई हो गई। हेप्टाथलन में इसके अलावा गोला फेंक और लंबी कूद स्पर्धा भी शामिल है।

स्वप्ना ने सात स्पर्धाओं में करियर के सर्वश्रेष्ठ 6026 अंक बनाकर स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले इन सात खेलों में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 5942 अंक था। राष्ट्रीय रिकार्ड हालांकि अभी भी जेजे शोभा के नाम है जिन्होंने 2004 में 6211 अंक बनाए थे। स्वप्ना ने कहा- 6000 अंक के आकड़े को पार करना बड़ी उपलब्धि है लेकिन मैं और अच्छा कर सकती थी। मैं इतनी चोटों के बाद भी एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर खुश हूं। उन्होंने दो दिन तक चली स्पर्धाओं में दांत के दर्द से निपटने के लिए दाएं गाल पर टेप लगया था।

स्वप्ना ने कहा- दांत की समस्या प्रतियोगिता से दो दिन पहले उभरी और दर्द काफी था। मेरा घुटना भी चोटिल था। यह चोट पिछले साल भुवनेश्वर में एशियाई चैंपियनशिप के दौरान उभरी थी लेकिन मैंने कभी भी प्रतियोगिता से हटने के बारे में नहीं सोचा। स्वप्ना की मीडिया से बातचीत से पहले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले गोला फेंक खिलाड़ी तेजिंदरपाल सिंह तूर के पिता करम सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि देने के लिए एक मिनट का मौन रखा गया था। करम सिंह का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को निधन हुआ था।

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